फतेहपुर। शहर को जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से बनाए गए कोराई बाईपास से वाहनों का आना जाना एक अगस्त 2025 को शुरू हुआ। अभी 29 दिन ही हुए हैं और बाईपास की सड़क के साथ उसमें स्थित पुल का अप्रोच मार्ग धंस गया है। लगभग 10 किमी के बाईपास में दो किमी में गड्ढे हो गए हैं। 424 करोड़ की लागत से तैयार हुए बाईपास की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोराई बाईपास बांदा-टांडा मार्ग को कानपुर-प्रयागराज नेशनल हाईवे से जोड़ने वाला 10 किमी लंबा संपर्क मार्ग है। इस मार्ग से रायबरेली, बांदा, कानपुर, प्रयागराज जाने वाले आठ से 10 हजार वाहनों का आना-जाना प्रतिदिन होता है। अभी तक बाईपास न बनने से सभी वाहन शहर के अंदर जेलरोड से होकर निकल रहे थे।
इससे नउवाबाग से राधानगर तक भीषण जाम लग रहा था। कोराई गांव से सटे दस किमी लंबे बाईपास का निर्माण कार्य 2012-13 में शुरू हुआ था और 2016 में इसे खोला गया। हालांकि वर्ष 2018 में रेलवे ओवरब्रिज में तकनीकी खामी सामने आने पर बाईपास को बंद करना पड़ा।
इसके बाद जनवरी 2021 में सीडीएस इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को नया ओवरब्रिज बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। दो वर्षों में पुल का निर्माण पूरा हुआ, और दिसंबर 2024 में रेलवे से अनुमति मिलने के बाद पुल पर सड़क बिछाई गई।
करीब सात महीने के भीतर अप्रोच मार्ग और कंक्रीटिंग का कार्य पूर्ण कर एक अगस्त 2025 को पुल को आम यातायात के लिए खोल दिया गया, लेकिन महज 30 दिन के भीतर ही पुल के दोनों ओर का अप्रोच मार्ग धंस गया है और पुल की सड़क में दरारें भी उभर आई हैं।
यही नहीं, कोराई गांव मोड़ तक बाईपास मार्ग पर गिट्टियां बिखरी पड़ी हैं और करीब 500 मीटर क्षेत्र में आठ से दस स्थानों पर गड्ढे बन गए हैं। पांच अगस्त को बाईपास के मार्ग में एक ट्रक के फंसने से चार से पांच घंटे का जाम लगा रहा। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में जल्दबाजी और मानकों की अनदेखी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। वहीं, प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले आठ से दस हजार वाहनों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है।
बाईपास व पुल के अप्रोच मार्ग की जानकारी नहीं है। यदि वाकई उसमें कोई कमी आई है तो शनिवार को ही टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द मरम्मत का काम भी शुरू करा दिया जाए। -नरेंद्र प्रताप सिंह, पीडी एनएचएआई