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युवक को अगवा कर हत्या का प्रयास

Mon, 27 Jun 2016 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो फतेहपुर
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कोतवाली में हत्थे चढ़ा आरोपी रईस। - फोटो : अमर उजाला
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 वैन सवार चार लोगों ने रविवार दोपहर लोधीगंज हाईवे पर कार सवार युवक को अगवा कर लिया। उसके साथी की सूचना पर पुलिस ने नाकेबंदी कर एक गैराज से अपहरणकर्ताओं की वैन पकड़ ली। मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार कर वहीं बंधक युवक को छुड़ा लिया। घटना के पीछे कार के लेनदेन का विवाद सामने आया है। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ अपहरण, हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज की है।
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अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटे पुष्पराज सिंह शहर के कलक्टरगंज निवासी करन सिंह के बेटे हैं। मूलरूप से गाजीपुर थाने के बंवारा गांव के रहने वाले हैं। वह शहर की एक आटो सेल्स कंपनी में काम करते थे। कं पनी के ड्राइवर धीरू के माध्यम से पुष्पराज ने सनगांव निवासी रईस से एक इंडिका कार ली थी। कार का सौदा तय हो गया था लेकिन रुपयों का लेनदेन और कागजी कार्रवाई बाकी थी। इसी दौरान कार एक मामले में थरियांव थाने में पकड़ ली गई। रईस कार के रुपये पुष्पराज से लगातार मांग रहा था।


रविवार को पुष्पराज आवास विकास निवासी रतन सिंह के साथ आल्टो से खागा जा रहे थे। लोधीगंज के पास वैन सवार लोगों ने आल्टो गाड़ी में टक्कर मारी। कार के रुकते ही पुष्पराज को घसीटा और तमंचा सटाकर वैन में उठा ले गए। यह देख रतन ने तुरंत 100 नंबर पर सूचना दी।
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कोतवाली पुलिस ने नाकेबंदी की और नउवाबाग में रईस के गैराज में खड़ी वैन पकड़ ली। पुलिस ने रईस को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही गैराज के अंदर बंधक पड़े पुष्पराज को मुक्त कराया। कोतवाल आरके पांडेय ने बताया कि रईस व तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण, हत्या की कोशिश की रिपोर्ट दर्ज की गई है।


शराब माफिया के पचड़े में फं सी कार- फतेहपुर। कलक्टर गंज निवासी एवं आटो सेल्स कंपनी में कार्यरत पुष्पराज सिंह द्वारा कंपनी चालक धीरू के माध्यम से एक साल पहले खरीदी गई कार शराब कारोबार में संलिप्त थी। बताया कि थरियांव पुलिस ने एक साल पहले इंडिका कार अवैध देशी शराब के साथ पकड़ी थी। पुलिस ने कार को सीज कर दिया था। अपहरण की घटना के बाद कार का राज सामने आया है।


शराब माफिया ने शातिर तरीके से कार का सौदा पुष्पराज से किया था, उसने ट्रायल के बहाने कार ले ली थी। माफिया उसी कार में शराब बेचने जा रहे थे। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद कार पुलिस कार्रवाई में फंस गई। पुलिस के डर से कार का दावेदार नहीं पहुंचा।
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