नौहइया गोशाला में बिना टीन का शेड।
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थरियांव (फतेहपुर)। गोशाला पर्याप्त इंतजाम के दावे प्रशासन भले ही कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सर्दी, गर्मी और बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त टीनशेड तक नहीं बने हैं। कड़ाके की ठंड में मवेशियों को खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। गर्मी और बारिश में भी मुश्किलों के बीच मवेशियों को रहने को मजबूर होना पड़ता है।
हथगाम ब्लाक के नौहइया गोशाला का वर्ष 2018 में केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने लोकार्पण किया था। तब भूसा रखने के लिए एक शेड बनाया गया था। दो शेड मवेशियों को रखने के लिए बनाए गए थे, एक शेड में टीन नहीं लगाई गई थी। गोवंशों के लिए बनी टीनशेड में करीब 100 मवेशियों को रखने की क्षमता है। मवेशियों की संख्या बढ़ने की वजह से अब दोनों शेडों में भूसा व अन्य सामग्री रखने के इंतजाम किए जाते हैं। गोवंशों के लिए अधूरे टीनशेड में चारा, पानी की व्यवस्था की जाती है। सर्दी के मौसम में मवेशी ठिठुरते हैं और गर्मी में लू के थपेड़ों से बेहाल रहते हैं। सर्दी का असर तो कम हो गया है, लेकिन इसके बाद गर्मी का मौसम शुरू होगा। जो मवेशियों के लिए खासी दिक्कत होंगी। गोशाला में छाया के लिए पेड़ भी नहीं हैं।
चार महीने से नहीं मिली मजदूरी
फतेहपुर। गोशाला में काम करने के लिए नौ मजदूर लगाए गए हैं। इनको रोज 250 रुपये के हिसाब से साढ़े सात हजार रुपये महीना दिया जाता है, लेकिन चार महीने से इन्हें मजदूरी नहीं दी गई है। फिर भी बेजुबान मवेशियों से इन मजदूरों का मोह कम नहीं हो रहा है। मजदूरी न मिलने के बाद में गोवंशों की सेवा में लगे रहते हैं