धाता विकास खंड के यमुना कटरी गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। सरकारी हैंडपंपों की हालत बदतर हो गई है। मात्र एक तिहाई हैंडपंप के भरोसे पेयजल व्यवस्था है। लोगों को आधा किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है।
जल निगम के जेई ने बताया कि ब्लाक के सभी गांव और मजरों में कुल 2,275 सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इनमें सात सौ हैंडपंप रिबोर के श्रेणी में हैं। करीब 810 हैंडपंप खराब हैं। जिनसे पानी की जगह हवा निकल रही है। साढे़ सात सौ हैंडपंपों से 68 ग्राम पंचायतें और इनके मजरों के लोग प्यास बुझाने के लिए जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों की शिकायतों का भी विभाग पर असर नहीं पड़ रहा है। विभाग बजट न होने का रोना रो रहा है। ग्रामीण कल्यान सिंह, मुदीन, मिठाईलाल सिंह, कल्लू, विशंभर, धर्मेंद्र, हरेकृष्ण त्रिपाठी और शब्बीर अहमद ने बताया कि गांवों में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना छोड़ दिया है। जिससे पेयजल की किल्लत पैदा है।
इन लोगों ने बताया कि गांव के बाहर लगे नलकूपों से पानी लाकर प्यास बुझाते हैं। वहीं प्रधान वीरेंद्र सिंह यादव, महेश प्रताप, ऊषा देवी, रविदन्निशा, दशरथ और ओमनारायण का कहना है कि खातों का संचालन बंद होने से खराब हैंडपंपों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। उधर, जेई गुलाम जिलानी ने बताया कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। बजट आते ही सभी रिबोर श्रेणी के हैंडपंपों की रिबोरिंग की जाएगी।
ब्लाक के यमुना कटरी गांव सेमरी, तुलसीपुर, मखउवा, रानीपुर, सैदपुर, कोट, ऐरई, सलेमपुर, अढ़ैया, परवेजपुर, नसीरपुर, डड़िया, चदनमऊ, दौलतपुर, गाजीपुर, कुल्ली, रहमतपुर, शिवदासपुर, शंकरपुर, खरसेड़वा, बेनीपुर, घरवासीपुर और उरई आदि गांवों में पेयजल संकट है।