-क्षेत्र में वर्षों से कई मुद्दों का नहीं निकला हल, चुनाव नजदीक आया, वादे फिर हवा-हवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
खागा (फतेहपुर)। लोकसभा चुनाव में मतदाताओं के बीच जमीनी मुद्दे नदारद हैं। स्थानीय मुद्दों की जगह नेताओं से लेकर मतदाताओं तक की जुबान पर राष्ट्रीय-अर्तराष्ट्रीय मुद्दों ने डेेरा जमा रखा है। इन्हीं मुद्दों पर आपस में तू-तू, मैं-मैं हो रही है। खागा तहसील क्षेत्र की विजयीपुर-गाजीपुर रोड, धाता-हिनौता रोड, धाता-विजयीपुर में मिनी शुगर मिल की स्थापना, दामपुर-चिल्ली के बीच यमुना नदी पर पुल जैसी मुद्दों पर न तो जनता का ध्यान है और न ही प्रतिनिधियों का। चुनाव के नजदीक आते ही प्रत्याशी एक बार जनता का मन टटोलने के लिए इस दुखती नस को जरूर दबाते हैं और फिर आश्वासन का मरहम भी लगाते हैं। चुनाव समाप्त होने के बाद पांच वर्ष तक जमीनों मुद्दों पर कोई काम नहीं होता है।
फोटो-08-ध्वस्त गाजीपुर-विजयीपुर रोड निर्माण को लेकर हुआ था प्रदर्शन। (आर्काइव) तीस साल से ध्वस्त गाजीपुर-विजयीपुर मार्ग
खागा। गाजीपुर-विजयीपुर रोड खागा तहसील क्षेत्र की प्रमुख सड़क है। 34 किलोमीटर लंबी सड़क यदि बन जाती तो 150 से अधिक गांव व दो लाख से अधिक आबादी को राहत मिलतीष सड़क 30 वर्षों से ध्वस्त है। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय व उनके सहयोगियों ने इस सड़क निर्माण के लिए दो अक्तूबर 2023 को आंदोलन किया। बजट भी मिल चुका है, लेकिन अक्तूबर से अप्रैल आ गया और सड़क वैसे की वैसी ही है। मुद्दा-2
फोटो-09-ध्वस्त धर्मनगरी पहुंच धाता-हिनौता मार्ग। संवाद
दुर्दशा पर आंसू बहा रहा धाता-हिनौता मार्ग
धाता। धाता-हिनौता मार्ग पिछले 15 वर्षों से ध्वस्त हैं। 10 किलोमीटर लंबा यह मार्ग यात्रियों को धाता से कौशांबी, राजापुर, चित्रकूट, मैहर जैसे स्थानों तक ले जाता है। धर्मनगरी कहे जाने वाले चित्रकूट जनपद के लिए सबसे सरल मार्ग तहसील क्षेत्र का यही है। बावजूद इसके इस मार्ग से प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने दूरी बना रखी है। अढ़ौली के रहने वाले रमेश सिंह कहते हैं कि मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है और इस पर यात्रा करना बेहद ही कठिन हो गया है। दस किमी लंबा मार्ग पिछले 15 साल से मरम्मत और निर्माण को मोहताज है।
फोटो-10-बाराबंकी जाने को ट्रक में लदा गन्ना। (आर्काइव) नहीं बनी मिनी शुगर मिल
खागा। तहसील क्षेत्र का धाता और विजयीपुर ब्लॉक क्षेत्र कभी गन्ने का गढ़ था। दोनों ब्लॉक क्षेत्रों में करीब 20 वर्ष पहले तक चार हजार एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की फसल पैदा हो रही थी। समय पर गन्ने का भुगतान नहीं होने, लंबी प्रक्रिया, मिनी शुगर मिल न होने, फसलों पर लगने वाले रोक और खुली बाजार का विकल्प भी नहीं होने पर किसानों का मोह गन्ने की फसल से भंग हो चुका है। मौजूदा समय गन्ने की पैदावार का क्षेत्रफल सिकुड़कर दो हजार एकड़ रह गया है।
मुद्दा-4
फोटो-11-दामपुर घाट से नाव से नदी पार करते ग्रामीण। (आर्काइव)
दामपुर-चिल्ली के बीच पुल का मुद्दा भी गायब
धाता। धाता ब्लॉक से खागा तहसील की दूरी 36 किमी और जिला मुख्यालय की दूरी 71 किमी है। तटवर्ती इलाकों के लोग अपना व्यापार यमुना पार जाकर करते हैं। ब्लॉक की लाखों की आबादी दामपुर से चिल्ली चित्रकूट जनपद का गांव को जोड़ने वाले यमुना नदी पर पुल की मांग कर रहे है। सैदपुर गांव के रहने वाले लल्लू निषाद पूर्व प्रधान, ओम नारायण निषाद, हरिमोहन सिंह, कल्लू आदि कहते हैं कि दामपुर से चिल्ली के बीच पुल का होना बहुत आवश्यक है। पिछले लोकसभा चुनाव में पुल बनाने का आश्वासन तो सभी प्रत्याशियों ने दिया लेकिन उम्मीद अब तक पूरी नहीं हुई।