चौबीस घंटे लगातार बारिश ने किसानों को भारी क्षति पहुंचाई। एक तरफ जहां
अरहर और चने के फूल गिर जाने से सैकड़ों हेक्टेयर फसल चौपट हो गई, वहीं
प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण बिंदकी के नवीन मंडी स्थल में किसानों व
व्यापारियों का हजारों क्विंटल तौल के लिए पड़ा अनाज पानी में भीग कर खराब
हो गया।
व्यापारियों व किसानों में इस बात को लेकर शासन व प्रशासन के प्रति
आक्रोश है। किसान भीगे खाद्यान्न को परिसर में भरे पानी से बचाने के लिए
रात दिन मेहनत करने में जुटे हैं।
अधिकारियों से कई बार मांग करने के
बावजूद प्रशासन व मंडी सचिव ने इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया। इसका
खामियाजा व्यापारियों व किसानों को उठाना पड़ रहा है।
भीगे बोरे के इर्द
गिर्द भारी पैमाने पर भरे पानी को निकालने के लिए अब किसान व व्यापारी रात
दिन कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
व्यापारी सौरभ, जीतू, सुरेश सैनी बाबा, मुन्ना
भाई, संदीप सैनी, राहुल सिंह आदि ने बताया कि मंडी परिसर में ए, बी, सी
दर्जे की दुकानें हैं।
इन दुकानों के आवंटन के समय व्यापारियों को बिजली,
पानी, शौचालय, भंडारण व सुरक्षा की सुविधा मुहैया कराने की बात कही गई थी।
व्यापारियों के आने के बाद कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, चबूतरे इतने
छोटे है कि बारिश का पानी यहां तक घुस आता है। टीन शेड की व्यवस्था न होने
से धान व खाद्यान्न हमेशा भीग जाता है, जिसमें करोड़ों का नुकसान उठाना
पड़ता है।
व्यापारियों ने कहा है कि यदि मंडी प्रशासन उन्हें सुविधाएं
नहीं देगा तो यहां से पलायन कर जाएंगे। किसान देवेंद्र पटेल, रामप्रकाश,
महेंद्र, ने बताया कि उनका खाद्यान्न तौल के लिए पड़ा हुआ था, जो बारिश के
पानी में भीग कर बर्बाद हो गया है। पानी इतना अधिक भरा हुआ है कि जल निकासी
के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही
है।
इंसंट
जांच कराकर भेजेगें रिपोर्ट- एसडीएम
बिंदकी।
एसडीएम और मंडी के सभापति शिव प्रसाद ने मंडी समिति की अव्यवस्थाओं व भीगे
खाद्यान्न को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि इस समस्या का समाधान कराने के
लिए डीएम व मंडी निदेशक को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा।
शीघ्र ही किसानों व व्यापारियों को सुविधाएं मुहैय्या कराई जाएंगी।
फोटो परिचय13-अरहर की बर्बाद फसल
अरहर और चने की फसल बर्बाद
खागा।
मौसम के यू-टर्न से खेती बाड़ी के सारे काम ठप हो गए हैं। बरसात से सबसे
अधिक दलहन की फसलों का नुकसान हुआ है। अरहर और चने के फूल गिर जाने से
फसलें चौपट हो गई हैं। किसान नथन सिंह, धनराज, नवल सिंह और हरिओम ने बताया
कि बिन मौसम की बारिश से अरहर और चने की फसल बर्बाद हो गई र्है। इंट भट्ठा
मालिक नूरउद्दीन अंसारी और दिग्विजय ने बताया कि फड़ की लाखों कच्ची ईटें
मिट्टी में बदल गई। भानुप्रताप सिंह और अनिल कुमार ने बताया कि बरसात होने
से गन्ना पेराई का काम करीब एक सप्ताह के लिए ठप हो गया है।
24 घंटे और मौसम खराब रहने के आसार
फतेहपुर।
मौसम विशेषज्ञों की माने तो अभी अगले 24 घंटे तक मौसम खराब रहने के आसार
हैं। अन्नदाता कहा जाने वाला किसान समस्याओं से उभर नहीं पा रहा है। दो
तिहाई से फसलों में मौसम की मार पड़ रही हैं। इससे जनपद का किसान कर्ज में
पूरी तरह से डूब गया है। खरीफ की फसल में लिया गया ऋण किसान अभी तक चुकता
नहीं कर पाया है। मौसम की मार से रबी की फसल एक-एक कर बर्बाद हो रही हैं,
जिसमें पहले कड़ाके की ठंड व शीतलहर से आलू की फसल बर्बाद हो गई। शुक्रवार
की शाम से लगातार बारिश से गेहूं की फसलों में संकट छा गया है। किसान ने
बताया कि बारिश से गेहूं की फसल गिर गई है, जिसका पैदावार में काफी नुकसान
हो जाएगा। अब तो गेहूं के फसल की खाद, बीज और पानी की लागत भी निकालना
मुश्किल हो जाएगा।
इनसेट
बारिश से इन फसलों में है नुकसान और अच्छादन
फतेहपुर।
बेमौसम हुई बारिश से गेहूं, चना, अरहर और मसूर की फसलों में भारी नुकसान
का अनुमान हैं। रबी की फसलों में गेहूं का आच्छादन एक लाख 76 हजार
हेक्टेयर, चना का अच्छादन 41 हजार 896 हेक्टेयर और अरहर का अचछादन 19 हजार
473 हेक्टेयर किया है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो बारिश से 25 से 30 फीसदी
फसलों में नुकसान होने की संभावना हैं।
इनसेट
किसानों ने बयां किया दर्द
फतेहपुर।
मलांव के किसान शिवकुमार ने बताया कि में आलू की खुदाई का समय चल रहा है।
दर्जनों किसानों का खुदा हुआ आलू का ढेर खेत में लगा है। बेमौसम हुई
जोरदार बारिश की वजह से कम से कम एक हफ्ते तक खेतों में ट्रैक्टर भी नहीं
जा पाएंगे, जिससे आलू को भरा कर शीतगृहों में रखाया जा सके। शिवपुर के
किसान शिवमोहन ने बताया कि गेहूं की बालियों मेें दाना भी नहीं भर पाया है।
बारिश में फसल गिर गई है, जिससे पैदावार में काफी नुकसान हो जाएगा। किसान
रामगोपाल ने बताया कि दो माह से हफ्ते दस दिन में हो रही बारिश से पहले चना
और अरहर की फसल बर्बाद हो गई।
क्या कहते है जिम्मेदार
‘दलहनी
तिहलनी फसलों में ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। बारिश के साथ हवा चली
तो गेहूं में भी नुकसान आएगा, जिसकी पड़ताल कराई जाएगी। 50 फीसदी से अधिक
नुकसान पर किसानों को फसल नुकसान का लाभ मिलेगा।’ - रविकांत सिंह, कृषि
अधिकारी।