किशनपुर। राम देवालय मैदान में मंगलवार रात रामलीला मंचन के दौरान सीता स्वयंवर के बाद जब श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं, तभी कैकेई मंथरा के बहकावे में आकर राजा दशरथ से राम के लिए वनवास मांग लेती है। यह दृश्य आते ही मंचन भावुक मोड़ पर पहुंच गया।
श्रीराम के वनवास की घोषणा होते ही अयोध्या नगरी में शोक छा गया। राजा दशरथ की करुण पुकार और विछोह के दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उपस्थित जनसमूह में कई लोगों की आंखें नम हो गईं। मंचन के दौरान समिति के सदस्य मृत्युंजय अग्रवाल, शुभम सिंह, आशीष शुक्ला, रज्जन शुक्ला, राजा अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
दशहरे से पहले शुरू होती है रामलीला, नहीं होता रावण दहन
ज्वालागंज स्थित रामलीला मैदान में श्री महानंद रामलीला कमेटी की ओर से बुधवार से 17 दिवसीय रामलीला का शुभारंभ हुआ। पहले दिन गणेश पूजा और यज्ञ प्रतिष्ठा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। समिति अध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि यह परंपरा करीब 203 वर्षों से चली आ रही है। इसमें दशहरे से एक दिन पहले रामलीला शुरू की जाती है।
विशेष बात यह है कि यहां रावण दहन नहीं किया जाता। पूर्वजों की परंपरा के अनुसार रामलीला का समापन श्रीराम के राज्याभिषेक के मंचन के साथ होता है। आयोजन के दौरान चार भव्य झांकियां भी निकाली जाती हैं, जो भक्तों और दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहती हैं।
राम दरबार की भव्य शोभायात्रा से नगर हुआ भक्तिमय
बुधवार शाम नगर के रामलीला मैदान से श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बिंदकी विधायक जयकुमार सिंह जैकी और मेला कमेटी ने पूजन कर यात्रा की विधिवत शुरुआत की। यात्रा के दौरान नगर का वातावरण जयकारों से गूंज उठा। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई रामलीला मैदान पर संपन्न हुई। कमेटी अध्यक्ष शिवम उर्फ प्रमोद सिंह परिहार ने बताया कि बृहस्पतिवार को विशाल मेले का आयोजन होगा। इसमें श्रीराम और रावण के बीच युद्ध के मंचन के साथ रावण वध की लीला प्रस्तुत की जाएगी। शोभायात्रा में अनिल गुप्ता, सुधीर त्रिपाठी, गोपाल जी गुप्ता, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मधुराज विश्वकर्मा, वीरेंद्र दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।