जिला अस्पताल के एक्सरे कक्ष में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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फतेहपुर। जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही। दवाओं के संकट से जूझ रहे जिला अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर संचालकों की चांदी हो गई है। बुखार रोगियों से अस्पताल के तीनों वार्ड भरे हैं। पंजीकरण, दवा वितरण खिड़की से लेकर फिजीशियन कक्षों में मरीज नंबर लगाए रहे। सर्जिकल मरीजों को टांके लगवाने के लिए सुई तागा तक बाहर से खरीदना पड़ रहा है। जिला अस्पताल सिर्फ डॉक्टरों का परामर्श केंद्र बनकर रह गया है।
सोमवार को जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे पंजीयन खिड़की में रोगियों की लंबी लाइन लगी थी। तब तक 1365 मरीजों का पंजीयन हो चुका था। यह संख्या आम दिनों की अपेक्षा 50 प्रतिशत अधिक है। दवा वितरण कक्ष मेें रोगियों की भीड़ लगी थी। दोपहर 12.05 बजे पैथालॉजी और एक्सरे कक्ष की गैलरी में बड़ी संख्या में मरीज बैठे अपना नंबर आने का इंतजार कर रहे थे।
पैथालॉजी में चार टेक्नीशियन जांच कर रहे थे। सोमवार को 20 डेंगू और 50 मलेरिया के सैंपल लिए गए। डेंगू जांच की सुविधा जिला अस्पताल में नहीं है। सैंपल जांच के लिए कानपुर भेजे जाएंगे। एक्सरे मशीन तो ठीक है, लेकिन फिल्म का स्टाक नहीं है। मरीजों को एंड्रायड फोन पर एक्सरे की कापी दी जा रही। 12.20 बजे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक डेंगू मरीज भर्ती था। सभी बिस्तरों पर मच्छरदानी लगी थी। इसमें छह बेडों की व्यवस्था थी। शेष पूरा वार्ड बुखार रोगियों से खचाखच भरा नजर आया।
महिला वार्ड फुल मिला। शिशु वार्ड में भी पुरुष रोगी भर्ती दिखे। अस्पताल के ओपीडी में बने शौचालय और पेशाबघर पूरी तरह से ध्वस्त हैं। दीवारों में पान की पीकें पड़ी हैं। ओपीडी में सभी फिजीशियन कक्षों में रोगियों की लंबी लाइन लगी थी। रोगियों के आने का सिलसिला जारी था।
जिला अस्पताल का दवा स्टोर खाली हो चुका है। कर्मचारी बताते हैं कि जिला अस्पताल के मेडिकल कालेज के अधीन होने के बाद से अस्पताल में हर समय दवा का संकट रहता है। वर्तमान समय में एक लाख 10 हजार पैरासिटामॉल है। एंटीबॉयटिक सिर्फ गंभीर रोगियों को दी जा रही।
अभी कुछ दिन पहले ही अस्पताल का कार्यभार संभाला है। अभी दवा के संकट की जानकारी नहीं है। स्टोर इंचार्ज से दवाओं की उपलब्धता की रिपोर्ट मांगी जाएगी।
- डॉ. पीके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल