हसवा। स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन और न ही किसी प्रकार की डिग्री है। लेकिन क्लीनिक का तामझाम देखेंगे तो रजिस्टर्ड क्लीनिक भी शरमा जाए। हम बात कर रहे है क्षेत्र में बेखौफ संचालित हो रहे नर्सिंग होमों की। स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों की नजरें इनायत होने से यह खेल चल रहा है। यहां पर बिना किसी दहशत के आपरेशन तक किए जा रहे हैं।
हसवा ब्लाक क्षेत्र के थरियांव, आंबापुर, बिलंदा, में करीब आधा सैकड़ा झोलाछाप इलाज कर रहे हैं। जिसमें आंबापुर में ही करीब एक दर्जन झोलाछाप हैं। इनमें तीन ने तो नर्सिंगहोम का रूप दे रखा है। एक नर्सिंग होम में महिला की मौत भी हो चुकी है। इसमें संचालकों ने पीड़ित के परिजन से लेनदेन कर शव का अंतिम संस्कार करा दिया था। आंबापुर में चिकित्सक रोड किनारे चारापाई, तखत में मरीजों को लिटाकर ड्रिप चढ़ाते है। झोलाछाप मरीजों से मनमानी दाम भी वसूलते हैं। कस्बे में एक नर्सिंग होम बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहा है। जिसमे मेडिकल स्टोर भी चल रहा है।
बिलंदा कस्बे में भी ऐसी दुकानें है। यहां पर डाक्टर तो सर्जरी भी करते हैं। हाइड्रोशील जैसे आपरेशन करना तो आम बात है। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण इनमे लगातार इजाफा हो रहा है। हसवा में भी झोलाछाप डाक्टरों की कमी नहीं है। बिना डिग्री के ओपीडी करते हैं। स्वास्थ्य विभाग के हरकत में आने पर एक दो दिन के लिए अस्पताल बंद कर देते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी उमाकांत पांडेय का कहना है कि कस्बों में निरीक्षण कराया जाएगा। तीन चार बार टीम भेजी गई थी लेकिन उन पर उगाही का आरोप लगा था। मौके पर स्वयं जाकर देखूंगा। कोई भी फर्जी नर्सिंग होम नहीं संचालित हो पायेगा
..................