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Fatehpur News: जाम न होता तो शायद बच जाती जान

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फतेहपुर। शहर के ज्वालागंज बस स्टैंड से लेकर सदर अस्पताल तक शनिवार दोपहर को जाम लगा रहा। इसमें दमा मरीज को जिला अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस भी फंसी रही। जाम के कारण तीन मिनट के सफर को तय करने में एंबुलेंस को 11 मिनट लग गए। मरीज को जब तक उपचार मिलता, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
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रामपुर थरियांव गांव निवासी मनोहर लाल (55) को दमा की बीमारी थी। शनिवार सुबह हालत बिगड़ने पर बेटा रवि सुबह 9.05 पर एंबुलेंस से थरियांव सीएचसी लेकर पहुंचा। वहां इलाज के बाद डॉक्टरों ने 9.15 पर उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस मरीज को लेकर लेकर जिला अस्पताल को रवाना हुई। सुबह 10.19 बजे एंबुलेंस शांतिनगर स्थित विज्ञान भवन मैदान के सामने पहुंची। यहां से छह सौ मीटर आगे ज्वालागंज चौराहे पर जाम के कारण एंबुलेंस के पहिए थम गए। लगातार सायरन बजने के बाद भी वाहन नहीं हटे। यहां पर करीब 3 मिनट तक एंबुलेंस फंसी रही। इसके बाद धीरे-धीरे पहिए बढ़े और जाम के बीच ही रेंगते हुए बाकरगंज तक पहुंची। यहां भी जाम में करीब 2 से 3 मिनट तक सायरन बजाते हुए एंबुलेंस खड़ी रही। आगे चल रहे वाहनों के नहीं हटने और जाम होने से एंबुलेंस जिला अस्पताल सुबह 10.30 बजे पहुंची। यहां तत्काल इमरजेंसी में लेकर मरीज को पहुंचे, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। एंबुलेंस के ज्वालागंज चौराहे से जिला अस्पताल की महज 1.3 किलोमीटर दूरी तय करने में पूरे 11 मिनट लग गए, जबकि रास्ते पर सामान्य यातायात होने पर यह दूरी अधिकतम तीन मिनट में तय की जा सकती है। मुख्य चौराहों पर जाम और अतिक्रमण की वजह से जिला अस्पताल पहुंचने में मरीज को आठ मिनट अधिक लग गए और समय से उपचार न मिलने पर मौत हो गई। पूरे जाम में एंबुलेंस को निकलवाने के लिए कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी आगे नहीं आया।
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