बेमौसम हुई जोरदार बारिश से जिले का किसान पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। इस बर्बादी में राहत देने में आगे आई सरकार ने जिले के किसानों को नजरअंदाज कर दिया। जबकि रविवार को जोरदार बारिश से 60 से 70 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई हैं। हालत यह है कि 50 फीसदी किसान परिवारों के लिए रोटी की समस्या हो गई है। बहुत से किसान शहरों मेें मजदूरी के लिए पलायन कर गए हैं।
हाड़ तोड़ मेहनत करके अपने परिवार के साथ दूसरों के लिए अन्न पैदा करने वाला किसान दाने-दाने के लिए मोहताज नजर आ रहा है। सोमवार को राज्य आकस्मिकता निधि से की जाने वाली सहायता में जिले का नाम न शामिल किए जाने से किसानों में मायूसी छाई है।
चंदापुर के किसान सत्यप्रकाश ने बताया कि प्रदेश सरकार ने किसानों के फसलों की पड़ताल कराने की घोषणा की थी, लेकिन लेखपाल घर में बैठकर फसलों के नुकसान का आकलन कर लेते हैं, जिससे सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। बारिश से यमुना तिरहार में 75 फीसदी फसल एकदम नष्ट हो गई है, जिससे परिवार के पालन पोषण के लिए भी अन्न नहीं होगा।
प्रगतिशील किसान आरवी सिंह ने बताया कि फरवरी माह में लहलहाती फसल देखकर बहुत से किसानों ने सपने संजोए थे, पर मार्च की शुरुआत में ही बेमौसम बारिश से किसानों के सपने चकनाचूर हो गए। जिले के किसानों को प्रदेश सरकार से उम्मीद थी कि फसल बर्बादी का कुछ तो मुआवजा मिल ही जाएगा, लेकिन जिले को बर्बादी की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।