प्रभु का क्षणिक स्मरण सभी व्याधियों को दूर कर देता
है। प्रभु के स्मरण से बड़े से बड़े अपराध भी समाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति
का चित्त निर्मल हो जाता है। राम घट-घट मे विराजमान हैं और जो सच्चे मन से
राम का स्मरण करता है उसे प्रभु की कृपा मिलती है। ज्ञान वह है जिसमें
अभिमान न हो जिसमें अभिमान है वह ज्ञान नहीं हो सकता। यह प्रवचन शिवहरेश्वर
रामजानकी हनुमान मंदिर नरसिंहपुर कबरहा में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा
के समापन पर चित्रकूट नयागांव के कथा व्यास युवराज स्वामी बद्री
प्रपन्नाचार्य जी महराज ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जीवन पर संकट
तब आता है जब तीन लोग गुरु, भगवान और भक्त साथ छोड़ देते हैं। राम कथा जीव
को प्रभु से मिलाने का माध्यम है। जीव भगवान की परीक्षा लेता है जबकि भगवान
परीक्षा की नहीं बल्कि चिंतन की विषय वस्तु है।
बालि उद्धार कथा के प्रसंग
का वर्णन करने के बाद वानर सेना द्वारा माता सीता की खोज, रावण वध और
अयोध्या में रामराज्य की स्थापना का मार्मिक वर्णन सुन श्रोता भावविभोर हो
गए।
स्वामी ने कहा कि रामचरित मानस में केवल दो ही लोग अतुलित बलवान बताए
गए हैं, पहले हनुमान और दूसरा इंद्रजीत। साधना के मार्ग पर जब भी जाएंगे,
विघ्न अवश्य आएंगे।
साधक को एकाग्रचित्त होकर भगवान का ध्यान करना चाहिए ।
कथा के अंत में आयोजक
पूर्व सांसद बालकुमार पटेल ने कथा व्यास युवराज स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य
जी महराज का फूल मालाओं और अंगवस्त्रम भेंट कर अभिनंदन किया ।