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Fatehpur News: गंगा के जलस्तर में दो सेमी की कमी, बाढ़ पीड़ितों का कम नहीं हुआ दर्द

Wed, 20 Aug 2025 02:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
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फोटो-38-सदनहा नई बस्ती गांव में बाढ़ में डूबी झोपड़ियां। संवाद
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औंग( फतेहपुर)। गंगा के जलस्तर में मंगलवार को दो सेंटीमीटर की कमी आई। अभी सोमवार तक गंगा खतरे के निशान 100.86 मीटर से 101.19 मीटर पर बह रही थी। मंगलवार को यह 101.17 मीटर पर रहा। लेकिन बाढ़ पीड़ितों का दर्द अभी तक कम नहीं हुआ है। बाढ़ के पानी में लोगों की झोपड़ियां गिर गईं और राहत शिविरों में राहत नहीं मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के प्रशासनिक अधिक केवल महुआ घाटी से ही लौट जाते हैं, लेकिन गांव के अंदर नहीं आते हैं। इससे उन्हें हमारी परेशानी का अंदाजा कैसे होगा।
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जिले में 14 अगस्त से गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही थी। मंगलवार को बाढ़ नियंत्रण विभाग के गेज रिपोर्ट में गंगा के जलस्तर में दो सेमी कमी पाई गई। अब गंगा खतरे के निशान से 31 सेमी ऊपर बह रही है। इससे अधिकारियों ने राहत की सांस ली, लेकिन अभी भी गांवों से पानी कम नहीं हुआ है। क्षेत्र के बेनी खेड़ा, बिन्दकी फार्म, सदनहा मदारपुर, जाड़े का पूरवा औसेरी और आसपास के गांवों के लोग अभी बाढ़ के पानी से घिरे हैं और लोगों के कच्चे मकान गिर गए है। प्रशासन व ग्राम पंचायत पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। ग्राम प्रधान और सचिव की लापरवाही से पात्र लोग वंचित रह गए हैं, जबकि अपात्रों को लाभ पहुंचा दिया गया। पक्का मकान होता तो घर गिरने की समस्या से बचते।
सदनहा गांव की आरती देवी बताती हैं कि उनके परिवार को अब तक आवास नहीं मिला। मजबूरन उनकी दोनों बहुएं छोटे बच्चों के साथ ससुराल लौट गईं। इसी तरह राजाराम, बिरेन्दे विनोद, खुद्दी, रामकिशोर अच्छे निषाद रंगी और रामप्रताप समेत दर्जनों परिवार आज भी आवास योजना से वंचित हैं। बाढ़ के कारण सदनहा व मदारपुर की बिजली काट दी गई है। जनरेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। अंधेरे व पानी से घिरे गांवों में लोग भय के साए में जीने को मजबूर हैं। मंगलवार को बाढ प्रभावित शिविर का निरीक्षण किया।
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उन्होंने मौके पर अधिकारियों को शिविर में खाने पीने, बिजली व्यवस्था व बाढ़ प्रभावित गांवों से लोगों को शिविर में लाने के निर्देश दिए। वहीं ग्रा्मीणों को उम्मीद थी कि डीएम बाढ़ प्रभावित गांवों में भी जाएंगे, लेकिन वह केवल शिविर से होकर निकल गए। लोग घंटों उनका इंतजार करते रहे कि साहब आएंगे और हालात देखेंगे। ग्रामीण निराश होकर लौट गए।
इसी तरह डीपीआरओ उपेंद्र राज भी केवल पंचायत भवन आशापुर जहां भोजन बन रहा है। वहां से महुआ बगिया से बाढ का हाल-चाल जानकारी चले गए लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। फिलहाल शिविर में कुछ सुधार किए गए। बाढ़ पीड़ितों के लिए लेटने के लिए चारपाइयां और गद्दे डाले गए। अब भोजन भी बैठाकर कराया जा रहा है। वहीं बाढ़ पीड़ितों का कहना कि यह केवल खाना-पूर्ति है। उनका असली दर्द फसल का नुकसान, आवास और स्थायी मुआवजा अब भी अनसुलझा है।
इनसेट
जिले में गंगा व पांडु नदी के एक होने से गुनीर गांव के मजरों रामदीनखेड़ा, दलाखेड़ा, कुम्हारनडेरा की करीब चार सौ बीघे फसल बाढ़ के पानी में जलमग्न हो गई। इसके साथ करीब सौ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। बच्चे मजबूरी में शिविर में पढ़ाई कर रहे हैं।
कोट्स
मंगलवार को गेज में गंगा के जलस्तर में दो सेमी की कमी है। अब लग रहा है। धीरे धीरे पानी कम होना शुरू हो गया है। इसको लेकर लगातार चौकसी बनाई हुई है। -एसएल वर्मा, बाढ़ प्रभारी अधिकारी
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कोट्स
बाढ़ पीड़ित परिवार के लोगों को तिरपाल दे दिया गया है। और भी प्रभावित के लिए प्रशासनिक तौर पर इंतजाम किए जा रहे हैं। शिविर में लगातार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ छोटे बच्चों के दूध व बुजुर्गो के लिए दरिया व नमकीन की भी व्यवस्था की गई है। -अचलेश सिंह, तहसीलदार, बिंदकी

फोटो-38-सदनहा नई बस्ती गांव में बाढ़ में डूबी झोपड़ियां। संवाद

फोटो-38-सदनहा नई बस्ती गांव में बाढ़ में डूबी झोपड़ियां। संवाद

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