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Fatehpur News: गंगा उफान पर, 400 बीघा फसल जलमग्न

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फोटो-34-सड़क पर बाढ़ भरे पानी से निकलते स्कूली बच्चे। संवाद
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चौडगरा/औंग। गंगा नदी का जलस्तर शुक्रवार को खतरे के निशान को पार कर गया। नदी का जलस्तर 89 सेंटीमीटर तक पहुंच गया जो खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने के साथ कटरी क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़ने लगे हैं।
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गंगा और पांडु नदी का पानी खेतों को डुबोने के बाद अब गांवों की ओर बढ़ रहा है। दोनों नदियों की बाढ़ से करीब 400 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। इससे किसानों के सामने फसल बर्बादी के साथ ही पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है।
मलवां ब्लॉक के अभयपुर, आशापुर और बिंदकी फार्म समेत तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घरों के आसपास पहुंचने लगा है। कटरी क्षेत्र में धान, बाजरा और सब्जियों की फसल पानी में डूब गई है।
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ग्रामीणों के मुताबिक हर साल बाढ़ की मार से खेती प्रभावित होती है और किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। दरियापुर कटरी निवासी राकेश ने बताया कि बाढ़ के कारण हर वर्ष फसल नष्ट हो जाती है। इस बार भी पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे परिवार और पशुओं को सुरक्षित रखने की चिंता बढ़ गई है।
बिंदकी फार्म गांव पहुंचने वाले एकमात्र रास्ते पर भी गंगा का पानी भरने लगा है। इससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया है। पानी और बढ़ा तो गांव का संपर्क पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। गांव तक पहुंचने वाले एकमात्र रास्ते पर पानी का बढ़ना ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है।
फिलहाल तटीय इलाकों में ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है। महुआई बगिया और आसपास के खेतों में पानी बढ़ने से पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। यदि जलस्तर में जल्द गिरावट नहीं आई तो ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ सकता है।
जिला आपदा अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि अभयपुर प्रधान रामदास निषाद से भी बात की गई है। अभी गंगा का पानी मुख्य रूप से फसलों तक पहुंचा है। गांवों में पानी घुसने की स्थिति बनते ही तत्काल शेल्टर सेंटर बनाए जाएंगे। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।



बाढ़ चौकी की तैयारियों पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने बाढ़ चौकी और राहत शिविरों की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। बड़ाखेड़ा निवासी रामादेवी ने बताया कि पिछले साल बाढ़ शिविर में चोरी की घटनाओं से लोग परेशान रहे थे। ऐसे में महिलाओं और बच्चों के अकेले शिविर में जाने को लेकर सुरक्षा की चिंता बनी हुई है। सुनील, राजाराम, भैयालाल और भोला ने बताया कि महुआई बगिया में अभी घास खड़ी है। छोटे बच्चों को जहरीले जीव-जंतुओं से खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें खुद घास साफ कर सुरक्षित जगह तैयार करनी पड़ रही है।


प्रशासन ने कहा, जरूरत पर तत्काल बनेंगे शेल्टर सेंटर
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत शिविर स्थलों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से टैंकरों से पीने के पानी और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था कराई गई है। शुक्रवार को एसडीएम निशांत तिवारी ने कटरी क्षेत्र और प्रभावित शिविर स्थल महुआघाटी का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर समस्याओं की जानकारी ली और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।

फोटो-34-सड़क पर बाढ़ भरे पानी से निकलते स्कूली बच्चे। संवाद

फोटो-34-सड़क पर बाढ़ भरे पानी से निकलते स्कूली बच्चे। संवाद

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