औंग (फतेहपुर)। गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान को पार कर गया है। निर्धारित खतरे का स्तर 100.86 मीटर है, जबकि बृहस्पतिवार को जलस्तर 100.88 मीटर पर पहुंच गया। इससे मलवां ब्लॉक के सदनहा, जाड़े का पुरवा, बिंदकी फार्म, मदारपुर जैसे गांवों में दोबारा बाढ़ ने दस्तक दे दी है। ग्रामीण अब बीमारी, भूख और बर्बाद फसलों के तिहरे संकट से जूझ रहे हैं।
बड़ाखेड़ा के किसान पंचम निषाद ने बताया कि कुछ दिन पहले ही वह राहत शिविर से घर लौटे थे, लेकिन अब दोबारा जलभराव शुरू हो गया है। सब्जियों की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है। अब धान की फसल भी डूबने की कगार पर है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। राहत शिविरों में केवल औपचारिकता निभाई गई, लेकिन जमीनी सहायता नहीं मिली।
नयाखेड़ा के सुनील ने बताया कि गांव में बुखार, खांसी और जुकाम जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। 50 से अधिक लोग बीमार हैं। इलाज के लिए लोग कर्ज लेकर निजी क्लीनिकों का सहारा ले रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य टीम अब तक गांव नहीं पहुंची है। मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि लोग रातें जागकर काटने को मजबूर हैं।
मदारपुर गांव की स्थिति और भी गंभीर है। यहां पांडु नदी का पानी गांव को चारों ओर से घेर चुका है। यदि जलस्तर यूं ही तीन दिन और बढ़ता रहा, तो हालात और खराब हो सकते हैं। ग्रामीणों को दोबारा महुआ घाटी के राहत शिविरों का रुख करना पड़ेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। न राहत सामग्री पर्याप्त है न स्वास्थ्य सेवाएं, और न ही जनप्रतिनिधि हाल जानने पहुंचे हैं। इस लापरवाही ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी है। इसे लेकर इंतजाम किए जा रहे हैं। राहत शिविर और कैंप भी लग रहे हैं। ग्रामीणों को कोई समस्या न होने दी जाएगी।
एसएल वर्मा, बाढ़ प्रभारी अधिकारी