फसल बर्बाद होने के सदमे से चार और किसानों ने दम
तोड़ दिया। मरने वालों में दो बकेवर क्षेत्र के और दो जाफरगंज इलाके के
किसान शामिल हैं।
जाफरगंज थाना क्षेत्र के समसपुर गांव निवासी
हीरालाल उर्फ भगत यादव (55) खेती किसानी से परिवार का भरण पोषण करते थे।
उनकी बहू की काफी दिनों से तबियत खराब चल रही है। उसके इलाज के लिए पचास
हजार रुपये कर्ज लिया था। शुक्र वार को वे खेतों पर कट रही फसल देखने गए
थे।
पैदावार कम देख उन्हें सदमा लगा, वे खेत में ही बेहोश हो गए।
वहां काम कर रहे लोग पानी छिड़कर किसी तरह होश में लाए और घर छोड़ा। घर पर
उनकी फिर हालत बिगड़ गई और बेहोश हो गए। परिजन पास के अस्पताल में ले गए।
डाक्टरों ने हालत नाजुक देखकर कानपुर रेफर कर दिया।
कानपुर लेकर
जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने शव का
पोस्टमार्टम कराया। परिजनों ने बताया कि वे कर्ज से परेशान रहते थे। उम्मीद
थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुका देंगे, पर बारिश और ओलावृष्टि ने
उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
इसी थानाक्षेत्र के मांझेपुर गांव
निवासी राममनोहर (55) दोपहर को खेतों में गेहूं की कटाई कराने गया था।
कतराई के समय कम उपज देखकर किसान को सदमा लगा। वह खेतों में पर ही गिरकर
बेहोश हो गया। उसको परिजनों ने पास के ही अस्पताल पहुंचाया। जहां पर
डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बकेवर संवाददाता के मुताबिक
थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव निवासी शिवनाथ (60) पुत्र कालीदीन फसल बर्बाद
होने से परेशान थे। शुक्रवार की रात घरवालों से कहा कि फसल बर्बाद हो गई
है, अब साल भर कैसे गुजारा होगा। इसके बाद घर के बाहर चारपाई डालकर सो गए।
सुबह
परिजनों ने मृत पाया। परिजनों ने पुलिस को तहरीर दी। बताया कि फसल बर्बाद
होने के सदमे में किसान की मौत हुई है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया
है। उधर, भैंसोली गांव निवासी कुंदन लाल यादव (60) पुत्र जौहरी दोपहर में
फसल की कटाई करने खेत में गए थे।
फसल बर्बाद देख उनको सदमा लगा और
वे बेहोश होकर गिर पड़े। परिजनों ने तत्काल गांव के सरकारी अस्पताल में
भर्ती कराया। वहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि कटी
फसल की कम उपज देखकर किसान को सदमा लगा है।