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उमर गौतम प्रकरण से सम्बंधित फोटो संख्या व उनके परिचय।

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फतेहपुर। एक हजार लोगों का धर्मांतरण कराने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड मौलाना उमर गौतम थरियांव थाना क्षेत्र के पंथुवा गांव रहने वाला है। उसने करीब 39 वर्ष पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मुस्लिम धर्म अपना लिया था। एटीएस की सूचना के बाद रात करीब नौ बजे थाना पुलिस ने उसके गांव पहुंचकर जानकारी
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जुटाई। पंथुवा गांव के मजरा रमवा गांव के बड़े काश्तकार रहे स्व. धनराज सिंह गौतम छह बेटों में श्याम प्रताप सिंह (मौलाना उमर गौतम) तीसरे नंबर का है। करीब 35 साल पहले उसने पंतनगर यूनिवर्सिटी से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद विधि की पढ़ाई के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में प्रवेश लिया। वहां पढ़ाई के दौरान श्याम प्रताप इस्लाम धर्म की तरफ आकर्षित हो गया। वर्ष 1982 में मुस्लिम धर्म अपना कर उसने अपना नाम मौलाना उमर गौतम रख लिया।
पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जामिया मिलिया इस्लामिया में इस्लामिक स्टडीज विभाग में लेक्चरर के पद पर तैनात हो गया। श्याम प्रताप सिंह के धर्म परिवर्तन की खबर से परिवार को गहरा सदमा लगा था। करीब डेढ़ साल पहले धनराज सिंह का निधन हो गया था। पिता के निधन की खबर पर मौलाना उमर गौतम गांव आया था। उनकी वेशभूषा देखकर गांव वाले भी दंग रह गए थे। इसके बाद उसे गांव में नहीं देखा गया।
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फतेहपुर। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया की क़रीब दस साल पहले धनराज सिंह गौतम की पत्नी की मृत्यु हो गई थी। तब उमर गौतम घर आया था। तब उसके पिता ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि मां के मरने पर तो आ गए लेकिन मेरे मरने में गांव आना।
फतेहपुर। श्याम प्रताप सिंह की शादी पड़ोस के गांव खेसहन में क्षत्रिय परिवार में हुई थी। पहली पत्नी से दो बच्चे भी थे। उमर के मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद ससुर ने बेटी को नहीं भेजा। क़रीब दस साल वह मायके में रही। बाद में उमर के साथ दिल्ली चली गईं। उमर ने दिल्ली में मुस्लिम महिला से दूसरी शादी कर ली थी। दूसरी पत्नी से एक बेटी व दो बेटे हैं।
फतेहपुर। उमर गौतम के सबसे बड़े उदय प्रताप सिंह उर्फ भूरे दिल्ली में रहते हैं। वह किसी बड़ी कंपनी में अधिकारी थे। उनके दो बेटे भी इंजीनियर बताए जाते हैं। दूसरे भाई उदय राज हिंडाल्को कंपनी से अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वह परिवार के साथ लखनऊ में रहते हैं। चौथे नंबर के भाई उदयनाथ आर्यन आरईएस में बाबू थे। वह शहर के राधानगर में गाजीपुर बस स्टॉप के पास रहकर गांव में खेती बाड़ी देखते हैं। पांचवें नंबर के भाई झुमरू प्रताप सिंह डीएवी कॉलेज कानपुर में प्रोफ़ेसर थे। उनकी एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। उनकी पत्नी परिवार के साथ कानपुर में रहती हैं। छठे नंबर के भाई श्रीनाथ गाजियाबाद में प्राइवेट कंपनी कर्मचारी हैं। वह वहीं रहते हैं।
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