बिंदकी। बेटे को पाकिस्तान की जेल से छुड़ाने के लिए वृद्ध पिता ने एक साल तक थाने और अधिकारियों के चक्कर लगाए। एक साल बाद कागजात उच्चाधिकारियों और भारतीय दूतावास को भेजे जा सके। अब पुत्र की पाकिस्तान जेल से रिहाई हो सकी है। परिवार को अभी पुत्र के घर आने कोई खबर नहीं मिली है।
कोतवाली क्षेत्र के कोरइयां गांव निवासी रामचंद्र का पुत्र बबलू दिल्ली स्थित एक जूता फैक्टरी में काम करता था। वहां से 2020 में एक जालसाज ने कमाई का लालच देकर पंजाब से हिंदुस्तान की सीमा पार कराकर पाकिस्तान भेज दिया था। पाकिस्तान के रेंजर्स ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। रामचंद्र ने बताया कि यह बात उन्हें काफी दिन गुजरने पर पता लगी थी। बेटे को छुड़ाने के लिए कानूनी कागजी प्रक्रिया को पूरा कराने में उन्हें एक साल से अधिक का समय लगा। इस दौरान जिले भर के अधिकारियों की चौखट पर बेटे को वापसी की उम्मीद में पिता रामचंद्र प्रार्थना पत्र देता रहा। देखते ही देखते तीन साल बीत गए। लोग कहने लगे थे कि वह लोग बेटे की वापसी की आस छोड़ दें। बता दे पाकिस्तान जेल से बबलू की शुक्रवार को रिहाई हो चुकी है। मां-पिता बेटे के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। परिजनों ने बताया कि भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने जल्द बेटे को सौंपे जाने की बात कही है।
जिले में अधिकारियों और खुफिया विभाग को बबलू के आने की खबर नहीं रही। खबर अमर उजाला में छपने होने के बाद एलआईयू की टीम कोरइयां गांव स्थित बबलू के घर पहुंची। टीम ने बबलू के माता-पिता से मुलाकात की। पूरे प्रकरण की जानकारी हासिल की। घर की फोटो खींचने के बाद टीम लौट गई। विभाग के अनुसार यह रिपोर्ट भारतीय दूतावास के उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। इसके बाद युवक को उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। (संवाद)