पारा के उतार-चढ़ाव से जायद की फसलों पर संकट आ गया है। किसानों की मेहनत व अधिक लागत के बावजूद फसलें हरी भरी नहीं हो रही हैं। तेज धूप व लू से सिंचाई के तीसरे दिन ही नमी गायब हो रही है। धान व गेहूं के बाद अब जायद की इस हालत से किसानों का मनोबल टूटता दिख रहा।
अप्रैल में पारा 44 डिग्री सेल्सियस पहुंचने से आसमान से आग बरस रही है। इससे जायद की फसल मूंग, केला, घुइयां और हरी सब्जी की फसलों पर संकट मंडरा रहा है। किसानों के सामने तो आगे कुआं पीछे खाईं वाली स्थिति है। धान के बाद गेहूं की फसल बर्बाद हो चुकी हैं। इन फसलों में किसानों की लागत नहीं निकल पाई। नुकसान की भरपाई के लिए किसानों ने जायद फसल की बुआई की तो यह हाल है।
परिवार का पालन पोषण का खर्च निकल पाना मुश्किल दिख रहा है। अप्रैल में भीषण गर्मी ने किसानों के इस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है। फसल तैयार होने के पहले ही सूखने लगी हैं। सिंचाई का भी फसलों पर कोई असर नहीं हो रहा है।
जयसिंहपुर गांव के किसान शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि 25 बीघा मूंग की फसल है। तेज धूप व गर्मी की वजह से पौधों में विस्तार नहीं हो रहा है। सिंचाई के तीसरे दिन ही खेत से नमी खत्म हो जाती है। धरमदासपुर के किसान भीम सिंह ने बताया कि धान की फसल सूखा व गेहूं की फसल मौसम की मार से बर्बाद हो चुकी हैं। इनमें खाद व बीज की लागत भी नहीं निकल पाई है। परिवार का खर्च चलाने के लिए दो बीघा घुइया के फसल की बुआई की है। अब वह भी सूख रही है।
गर्मी में कैसे करें सिंचाई:- जिला कृषि अधिकारी रविकांत सिंह ने बताया कि तेज धूप व गर्मी में हल्के पानी से फसलों की सिंचाई करें। अधिक पानी भरने से धूप में पानी गरम हो जाता है। गरम पानी से पौधोें की जड़ें खराब हो जाती हैं।