पीसीएफ के गोदामों में 4675 मीट्रिक टन यूरिया और 6578 मीट्रिक टन डीएपी डंप होने के बाद भी किसान उर्वरक के लिए परेशान है। साधन सहकारी समितियों के खाद, बीज लाइसेंस नवीनीकरण होने के बाद से जिले की आधा दर्जन समितियों में खाद नहीं पहुंची है। सहकारिता विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते समितियों के सचिवों ने अभी तक खाद की धनराशि नहीं जमा की है। जिससे क्षेत्र के किसान प्राइवेट दुकानों से खाद खरीद कर फसलों में छिड़काव करने के लिए मजबूर हैं। जबकि डीएम ने सभी समितियों में खाद पहुंचाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
डीएम के निर्देशों को धता बताकर सहकारिता विभाग काम कर रहा है। पीसीएफ के गोदामों में खाद होने के बावजूद भी किसानों को यूरिया उर्वरक के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सहकारिता विभाग ने 70 समितियों के खाद, बीज बिक्री के लाइसेंस जारी कराए हुए है, जिसमें साधन सहकारी समिति ओरम्हा, जगजीवनपुर, कोण्डावरपुर, लदिगवां, ललौली, कोर्रा कनकपुर की साधन सहकारी समितियों में अप्रैल माह से अभी तक खाद नहीं गई है। लाइसेंस नवीनीकरण के चक्कर में आधे से अधिक समितियों में जुलाई माह तक खाद नहीं पहुंच पाई थी। खरीफ फसल में सूखा की मार से जूझ रहे किसानों ने जैसे तैसे धान के फसल की रोपाई कर ली है, लेकिन समितियों में खाद न होने की वजह से क्षेत्र के किसानों प्रशासन की लापरवाही अखर रही है। जबकि पीसीएफ के गोदाम में 4675 मीट्रिक टन यूरिया और 6578 मीट्रिक टन डीएपी है।
कोट
- पीसीएफ जिला प्रबंधक रामशंकर ने बताया कि शनिवार को दमापुर, छिछनी, बावन, हसनापुर, सीतापुर, असोथर, टेक्सारी बुजुर्ग, गाजीपुर, नरैनी साधन सहकारी समितियों में खाद भेजी जा चुकी है। इटैली, मौहार, मलवां, ओखरा, बहुआ, चकसकरन, हसनपुर, अकबरपुर चोराईं, पट्टीशाह, सातो जोगा के सचिवों ने खाद की धनराशि जमा कर दी है।
कोट
- सहकारिता के एआर सीएल प्रजापति ने बताया कि सभी समितियों के सचिवों को खाद लेने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। जिन समितियों में खरीफ फसल में अब तक खाद नहीं उठाई है, उनको एक दो दिन के अंदर खाद उठाने की हिदायत दी गई है।