जहानाबाद। विधानसभा क्षेत्र में बचनीपुर घाट पर पुल निर्माण न होने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नदी में बाढ़ के समय पांच किमी दूर बकेवर जाने के लिए लोगों का 22 किमी की परिक्रमा करनी पड़ती है।
हर चुनाव आसपास के गांवों के मतदाता पुल निर्माण की मांग उठाते हैं, लेकिन अभी तक पुल निर्माण नेताओं के बयानों से आगे निकलकर जमीन पर नहीं उतर सका है।
बचनीपुर, नहरामऊ रिंद नदी घाट से होकर कपरिया ऊसर, करनपुर, बसफरा, खजुरिया, सहिमलपुर के ग्रामीणों का आवागमन होता है। इन गांवों के लोग हर चुनाव में घाट पर पुल निर्माण की मांग उठाते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक पुल का निर्माण नहीं हुआ।
ग्रामीण कहते हैं कि जिन प्रत्याशियों ने पुल निर्माण कराने का आश्वासन दिया, उनके पक्ष में इन गांवों के मतदाताओं ने खुलकर वोट किया, लेकिन बाद में जनप्रतिनिधियों ने उन्हें धोखा दिया।
सियासत की वादाखिलाफी के इस दर्द को सीने में समेटे मतदाता अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है। नदी पार करने के लिए लोग नाव का सहारा लेते हैं। बचनीपुर गांव से बकेवर की दूरी पांच किमी है।
नदी में बाढ़ आने पर आवागमन ठप हो जाता है। ऐसे में दैनिक सामानों की खरीदारी के लिए या बकेवर, देवमई, चौडगरा, औंग जाने के लिए उन्हें जहानाबाद या फिर घोरहा पुल से 22 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।
बचानीपुर के संजय निषाद कहते हैं कि पुल पूरे क्षेत्र की जीवन रेखा के समान है। यदि बन जाता है तो बड़े पैमाने पर आबादी को राहत मिलेगी। लोगों के लिए आवागमन तो सुलभ होगा ही किसानों की फसल को बाजार तक पहुंचने का भी मौका मिलेगा।
बसफरा निवासी कृष्ण कुमार शुक्ला का कहना है कि चुनाव के समय ही नेताओं को पुल का मुद्दा याद आता है। इसके बाद आमजन को खुद ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पुल बन जाएगा, तो क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
बचनीपुर के राजेश निषाद कहते हैं कि पिछले चुनाव में भी पुल निर्माण कराने का आश्वासन मिला था। एक के बाद एक जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल बीतता गया लेकिन पुल निर्माण नहीं हो सका।
बसफरा निवासी विनोद यादव का कहना है कि पुल क्षेत्र के विकास की रीढ़ है लेकिन किसी जनप्रतिनिधि ने इस पर ध्यान नहीं दिया। आवागमन से लेकर व्यवसाय तक प्रभावित होता है।
पुल बनाने के फायदे
- आवागमन सुगम होगा।
- रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- किसानों की जमीनों की कीमत बढ़ेगी।
- समय से साधन और वाहन सुलभ होंगे।
- शहर व कस्बों की दूरी कम होगी।
- व्यापार में और तेजी आएगी।
- आसपास के गांवों का विकास होगा।
- ग्रामीणों की आय पहले से बेहतर होगी।
कृष्ण कुमार शुक्ला। संवाद- फोटो : FATEHPUR
संजय निषाद। संवाद- फोटो : FATEHPUR
राजेश निषाद। संवाद- फोटो : FATEHPUR
विनोद यादव। संवाद- फोटो : FATEHPUR