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दुष्कर्म के मामले में दस साल की पैरवी के बाद हुई दस साल की सजा

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फतेहपुर। युवती से दुष्कर्म के मुकदमे में 10 साल की पैरवी के बाद शुक्रवार को अदालत ने मामा-भांजे को 10 साल की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
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मामला खागा कोतवाली क्षेत्र के टेनी गांव का है। जहां 19 मई 2011 की रात आठ बजे एक युवती शौंच के लिए गई थी। उसे रास्ते में ही गांव के शिवकुमार ने पकड़ लिया और नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया।
इसके बाद वह युवती को अपने मामा राकेश के घर फिरोजाबाद ले गया। जहां उसके सगे भाई शिवकरन और रामकरन पहले से मौजूद थे। तीनों ने युवती के साथ तीन महीने तक दुष्कर्म किया। इस मामले में पीड़िता के पिता ने एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने 6 अगस्त को पीड़िता को बरामद करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। आरोपियों में रामकरन की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी।
जिसके बाद इस प्रकरण में तीन आरोपी ही बचे थे। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सहायक शासकीय अधिवक्ता रहस बिहारी श्रीवास्तव ने एक के बाद एक नौ गवाहों के बयान कोर्ट में प्रस्तुत किए।
अपर सत्र न्यायाधीश नित्या पांडेय ने गवाहों के बयानों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश के क्रम में शिवकुमार पर आरोप सिद्ध न होने पर उसे दोषमुक्त कर दिया।
जबकि शिवकरन और राकेश को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिसका भुगतान पीड़िता को देय होगा। अर्थदंड का भुगतान न करने पर आरोपियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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