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सफाई कर्मचारी मस्त, गांव गंदगी से त्रस्त...

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कलाना गांव में आबादी में बिखरा कचरा। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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बिंदकी। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर शासन-प्रशासन पूरा जोर लगाए है। लाखों रुपये गांवों में स्वच्छता के नाम पर खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके मिशन की परिकल्पना साकार होती नहीं दिख रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई कर्मचारियों की तैनाती सिर्फ कागजों तक सीमित है। कर्मचारी गांव जाते ही नहीं। हालात यह हैं कि चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
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अमौली ब्लाक की 66 ग्राम पंचायतों के 99 राजस्व गांवों में कुल 119 कर्मचारियों की तैनाती है। जिसमें लगभग 35 महिलाएं हैं। आंकड़े बताते हैं कि प्रतिमाह 39 लाख 27 हजार रुपये इन कर्मचारियों के वेतन पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सफाई के नाम पर देखा जाए तो गांवों में जिस तरह से गंदगी के ढेर लगे हैं।
उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफाई कर्मियों की उपस्थिति कागजों में दर्ज कर ली जाती है। ग्रामीणों की मानें तो सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। सबसे अधिक गंदगी रामपुर हुसैना (फिरोजपुर) रायपुर, कलाना, न्योरी जलालपुर, चंदीपुर, रोटी, पपरेदां, कापिल, बसफरा, देवरी बुजुर्ग, दामोदरपुर, मधियांखेड़ा परसेढा, दपसौरा गांवों में है।
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20 हजार की आबादी पर दो कर्मी
ग्राम पंचायत चांदपुर की आबादी 20 हजार है। इसके मजरे जोड़ दिए जाएं तो कुल सात गांव है। जिनमें सफाई का जिम्मा सिर्फ दो कर्मचारियों के कंधे पर है। वह भी गांव के अस्पताल और विद्यालयों में ही व्यस्त रहते हैं।
इसके चलते गांव की नालियां सिल्ट से भरी हैं। परेशान होकर मजबूरी में ग्रामीणों को ही फावड़ा हाथ में थामना पड़ता है। ग्रामीण अंशु सिंह, पवन कुमार ने सफाई कर्मचारियों की बढ़ाए जाने की मांग की है।
गोशालाओं, स्कूलों से जो समय बचता है उसमें गांवों में सफाई कराई जाती है। समय-समय पर टीम गठित कर सफाई के प्रति अभियान भी चलाया जाता है। इसके बावजूद भी कोई सफाई कर्मी ड्यूटी में लापरवाही करता है, तो कार्रवाई की जाएगी। - विपुल विक्रम सिंह, बीडीओ अमौली
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