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केवट का प्रेम प्रसंग, कृष्ण सुदामा मिलन सुन श्रोता भावविभोर

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रेवाड़ी बुजुर्ग में श्रीमद्भागवत कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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चौडगरा। मलवां ब्लाक के रेवाड़ी बुजुर्ग में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा गुरुवार को समाप्त हो गई। अंतिम दिन कथा वाचक संत रामानंदाचार्य ने कृष्ण-सुदामा मिलन की कथा सुनाई।
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कथावाचक ने कहा कि सुदामा नामक एक ब्राह्मण श्रीकृष्ण के परम मित्र थे। उन्होंने श्रीकृष्ण के साथ गुरुकुल में शिक्षा पाई थी। वह गृहस्थ होने पर भी संग्रह परिग्रह से दूर रहते हुए भाग्य के अनुसार जो कुछ भी मिल जाता उसी में संतुष्ट रहते थे। कृष्ण से मिलते ही सुदामा के सारे दुख समाप्त हो गए।
वहीं श्रीराम कथावाचक शंकराचार्य स्वामी आत्मानंद सरस्वती महाराज ने केवट के भगवान श्रीराम को गंगा पार कराने की कथा सुनाई। कहा कि मांगी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।। चरन कमल रज कहुं सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई।।
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भगवान राम ने केवट से नाव मांगी, पर वह लाया नहीं। वह कहने लगा मैंने तुम्हारा मर्म (भेद) जान लिया। तुम्हारे चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी है।
जिसके छूते ही पत्थर की शिला सुंदर स्त्री हो गई। मेरी नाव तो काठ की है। काठ पत्थर से कठोर तो होता नहीं। मैं लुट जाऊंगा अथवा रास्ता रुक जाएगा। जिससे आप पार न हो सकेंगे और मेरी रोजी मारी जाएगी।
हे नाथ मैं चरण कमल धोकर आप को नाव पर चढ़ा लूंगा। मैं आपसे कुछ उतराई नहीं चाहता भगवन। मुझे आपकी दुहाई और राजा दशरथ की सौगंध है। पर जब तक मैं पैरों को पखार न लूंगा कृपालु मैं पार नहीं उतारूंगा।
केवट के प्रेम में लपेटे हुए अटपटे वचन सुनकर करुणाधाम भगवान राम जानकी और लक्ष्मण की ओर देखकर हंसे। भगवान राम केवट से मुस्कुराकर बोले भाई तू वही कर जिससे तेरी नाव न जाए। जल्दी पानी ला और पैर धो ले। देर हो रही है पार उतार दे।
कथा समापन के बाद आरती और प्रसाद वितरण हुआ। कथा में प्रेमा पांडेय, रामसनेही पांडेय, श्वेता पांडेय, सुमन पांडेय, नीरजा बाजपेयी, प्रसस्थि, मनन वैभव, अंकित, कुसुम बाजपेयी, विधायक करण सिंह पटेल, रवि, पूर्व ब्लाक प्रमुख जितेंद्र सिंह जीतू, रवि मिश्रा, अजीत सैनी पीयूष, रजय, पिंकू मौजूद रहे।
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