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किशनपुर, जीटी रोड का जाम है कि मुसीबत, राहत नहीं

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खागा चौक चौराहे पर जाम में फंसे वाहन। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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खागा। कई वर्षों से जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए अब यह मुसीबत बनता जा रहा है। सुबह से लेकर दोपहर तक जहां किशनपुर रोड पर यातायात रेंगता रहता है।
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वहीं रोजाना तीन बजे के बाद जीटी रोड जाम के चलते ठप हो जाता है। जाम से छुटकारा दिलाने के लिए समय-समय पर बैठकें जरूर हुई लेकिन कोई स्थायी हल नहीं निकल सका है। नतीजा ये है कि सड़कों पर वाहन दिनभर फंसे रहते हैं।
खागा कस्बे की किशनपुर रोड बेहद ही महत्वपूर्ण सड़क हैं। इस सड़क पर तहसील, एसडीएम, सीओ ऑफिस, आवास, शापिंग माल, तीन प्रमुख बैंक, रेलवे स्टेशन हैं। ऐसे में सुबह आठ बजे के बाद यह सड़क इस कदर व्यस्त हो जाती है कि जाम लगना स्वाभाविक हो जाता है।
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इस जाम का कारण तहसील, बैंकों के सामने वाहन पार्क करने की जगह नहीं होना है। वाहन मालिक फुटपाथ पर ही वाहन पार्क कर देते हैं। इस समय फुटपाथ भी निर्माणाधीन है तो यह जगह भी प्रयोग में नहीं है।
बात करें खागा जीटी रोड की तो यहां पर बस स्टैंड से लेकर खागा चौक तक जाम की समस्या है। यहां भी सड़क की पटरियां दुकानदारों से भरी रहती हैं, नतीजा वाहनों को निकलने की जगह नहीं मिल पाती है।
सबसे अधिक जाम तीन बजे के बाद लगता है। जब स्कूल व कॉलेजों के छात्र व छात्राएं बाहर आते हैं तो करीब एक घंटे के लिए यातायात ठप हो जाता है। नियमित रूप से लगने वाला यह जाम अब लोगों को परेशान करने लगा है।
सड़कों को नहीं हो सका चौड़ीकरण
खागा में जाम लगने के पीछे सड़कों का कम चौड़ा होना भी है। करीब तीन साल पहले प्रशासन ने सड़कों को चौड़ा करने के लिए अतिक्रमण हटाया लेकिन अभी तक जीटी रोड को चौड़ा नहीं किया जा सका है। हालांकि किशनपुर रोड को चौड़ीकरण हो रहा है।
फेल साबित होती है पुलिस व्यवस्था
जाम से राहत देने के लिए चौक चौराहे, बस स्टाप व तहसील के पास गार्डों की ड्यूटी यातायात संचालन के लिए लगाई गई है। मगर, जब जाम लगता है तो गार्ड बिल्कुल बेबस हो जाते हैं। हालात ये होते हैं कि कोतवाली से पुलिस बल को चौराहे पर आना पड़ता है।
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व्यापार मंडल ने दी धरने की चेतावनी
जाम की समस्या को लेकर व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष शिवचंद्र शुक्ल ने कहा कि इस समस्या को लेकर एसडीएम, सीओ को ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद आलाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से इस समस्या से निजात दिलाने की बात रखी जाएगी। फिर भी नतीजा नहीं मिला, तो धरना होगा।
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