यमुना किनारे उड़तीं सैंड मार्टिन चिड़िया। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
किशनपुर। यूरोप महाद्वीप के देशों में मिलने वाली छोटी सी चिड़िया सैंड मार्टिन पिछले कुछ दिनों से यमुना के किनारे हवा में कलाबाजी करते देखी जा रही है। दमहा और तुर्की नाले के बीच एक रेत (मिट्टी) से बने टीले पर हजारों की संख्या में ये प्रवासी पक्षी आकर ठहरे हैं। टीले पर छेद बनाकर इन्होंने अपना घोंसला बनाया हुआ है।
सैंड मार्टिन के नाम से पहचानी जानी वाली यह चिड़िया मुख्य रूप से पानी के बहाव से बनने वाले टीलों पर निवास करती हैं। ऐसा ही एक टीला दमहा और तुर्की नाले के बीच पानी के बहाव के कारण बना हुआ है।
टीले में ऊंचाई पर पक्षियों ने छेद करके अपने घोंसले बनाए हैं और सुबह से शाम तक इनका शोर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बेहद तेज रफ्तार से उड़ने वाली यह चिड़ियां यमुना किनारे और टीले के आसपास उड़ने वाले कीट-पतंगों को हवा में ही पकड़कर निगल लेती है।
बताया गया कि चिड़िया मुख्य रूप से यूरोप महाद्वीप के देशों में अलग-अलग नाम से प्रचलित है और ठंड के मौसम में माइग्रेट (विस्थापित) होती हैं। करीब चार साल बाद पक्षियों के यह झुंड किशनपुर आया है।
मछली की तरह हैं इनकी पूंछ
हवा में कलाबाजी कर कीटों को पकड़ने वाली इस चिड़ियां की पूंछ बिल्कुल मछली की पूंछ की तरह होती है। इनकी लंबाई करीब 12 से 14 सेमी और वजन करीब 11 से 20 ग्राम होता है।
सैंड मार्टिन प्रवासी पक्षी है। भारत में यह ठंड के मौसम में प्रवास के लिए आती हैं। यह पक्षी बहुत अधिक ठंडी जगह पर नहीं रहता है। गर्मियां आते ही यह वापस यूरोप चली जाती है। - आजाद सिंह, पक्षी विशेषज्ञ, अयोध्या, फैजाबाद।
यमुना किनारे टीले पर बने सैंड मार्टिन चिड़िया के घोंसले। संवाद- फोटो : FATEHPUR