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पंचायत चुनाव: आरक्षण ने मठाधीशों के समीकरण किए ध्वस्त

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फतेहपुर। पंचायत चुनाव के आरक्षण की अनंतिम सूची ने सियासत के दिग्गजों के समीकरण ध्वस्त कर दिए हैं। जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत की कई सीटों में ऐसा आरक्षण हुआ है कि कद्दावर नेताओं को भी अपनी सियासी जमीन तलाशने में पसीना बहाना पड़ेगा। आरक्षण ने ऐसा समीकरण सेट कर दिया है कि चुनिंदा सीटों से हमेशा चुनकर आ जाने वाले नेताओं को इस बार मशक्कत करनी होगी।
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जिला पंचायत के सातों धरमपुर वार्ड से चुनकर आईं निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. निवेदिता सिंह की सीट इस बार के आरक्षण में अनुसूचित जाति के कोटे में चली गई है। उनके गांव संवत की जिला पंचायत सदस्य सीट भी अनुसूचित जाति के खाते में गई है। ऐसे में निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पति भाजपा नेता अभय प्रताप उर्फ पप्पू सिंह की सियासी गणित गड़बड़ाई है।
अब इन्हें अपनी सियासी पारी खेलने के लिए नई जमीन तलाशनी होगी। वहीं, निवेदिता के विरोध में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाली और अविश्वास की पहल करने वाली प्रसपा नेत्री किरन देवी के वार्ड रायपुर भसरौल की सीट इस बार अनुसूचित जाति के खाते में चली गई है। जिससे इन्हें भी इस बार नई सियासी कसरत ज्यादा करनी होगी। ब्लाक प्रमुख पद की बात करें तो हाल में हंसवा ब्लाक में निवर्तमान प्रमुख अक्षय लोधी और पूर्व प्रमुख इंद्रसेन यादव के बीच हुई वर्चस्व की तनातनी भी बेकार गई।
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अभी तक पिछड़ा वर्ग के कोटे की यह सीट अनुसूचित जाति के खाते में चली गई है। इसी क्रम में भिटौरा ब्लाक प्रमुख की सीट पर कांटे की टक्कर होने की गुंजाइश है। यह सीट इस बार अनारक्षित है। वहीं तकरीबन तीन दशक से सपा के पूर्व विधायक वीर अभिमन्यु सिंह उर्फ वीरन यादव के आधिपत्य में रही विजयीपुर ब्लाक प्रमुख की सीट अनारक्षित है।
जिससे यहां नए दावेदारों को प्रतिद्वंद्विता साबित करने का मौका मिल गया है। राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप उर्फ धुन्नी सिंह के प्रभाव वाली ऐरायां ब्लाक प्रमुख की सीट इस बार भी अनारक्षित है। वहीं हथगाम ब्लाक प्रमुख के पद में भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के प्रभाव में रही यह सीट इस बाद पिछड़ा वर्ग के खाते में चली गई है। ऐसी कई सीटें हैं, जिनमें सियासत के मठाधीशों के समीकरणों की बुनियाद आरक्षण ने हिला दी है।
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