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पैरों में पड़ गए छाले, घूंट-घूंट पानी पीकर किया सफर

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जिला अस्पताल में खड़े मुंबई से लौटे प्रवासी। - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। लॉकडाउन के चलते काम धंधा बंद होने पर मालिक ने पुलिस के आने की बात कही तो महाराष्ट्र कमाने गए लोग लौटने को विवश हो गए। कभी ट्रक की सवारी की तो कभी लंबी दूरी पैदल चलना पड़ा लेकिन यह हिम्मत नहीं हारे और अपनी मंजिल पा ली। हालांकि गांव पहुंचने पर एतराज जताने पर इन्हें सदर अस्पताल के फीवर हेल्थ डेस्क का सहारा लेना पड़ा तब जाकर उन्हें अपने अपने घरों में प्रवेश करने का मौका मिल पाया।
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हुसैनगंज क्षेत्र के ऊदीपुर गांव के वीरेंद्र कुमार, बबलू, राजेंद्र, धीरेंद्र और संतोष एक साथ एक ही कंपनी में मनावा में काम करते रहे। लॉकडाउन लगने पर जेब में जब तक माल रहा। जिंदगी जैसेे तैसे कटती रही। कंपनी के मालिक की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिला तो इन्हें महाराष्ट्र छोडना मजबूरी हो गया। इन सब को पूर्व प्रधान सुनील मौर्या लेकर आए थे। पूर्व प्रधान ने बताया कि सभी ऐहतियात के लिए यहां आए हुए हैं। मोहम्मद जियाउद्दीन ने बताया कि सात दिन की चलने पर फतेहपुर पहुंच पाए। यह लोग तीन-तीन हजार रुपये में ट्रक में बैठकर आए। बाद में वह पांच हजार रुपये और मांगने लगा न देने पर फतेहपुर से पचास किमी दूर छोड़कर चला गया। पैदल घर पहुंच सके।
फीवर हेल्थ डेस्क में भीड़ के चलते सदर अस्पताल के बाहर बैठकर इंतजार कर रहे एक जत्थे ने बताया कि वह लोग एक लाख 39 हजार रुपये ट्रक का भाड़ा देकर जनपद सीमा के बाहर तक आए। इस पर सभी को चार चार हजार रुपये वहन करने पड़े। हालांकि तब भी पैदल चलना पड़ा। लिहाजा पैरों पर छाले पड़ गए। जत्थे के राज कुमार ने बताया कि उन्हें ललौली के उस पार उतार दिया। इनका आरोप है कि पांच हजार कम देने पर पहले ही उतार दिया गया जिससे सड़क छोड़ पैदल चलना पड़ा। एक दूसरे जत्थे जिसमें 42 लोग थे। ने बताया कि उन्हें रास्ते में प्यासे रहना पड़ा। यही वजह रही कि घूंट घूंट पानी पीकर जिंदा रहे। बिंदकी के पास जब पुलिस ने भोजन कराया तो जान में जान आई।
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