फतेहपुर। कार्यदायी संस्था सीएंडएस की मनमानी से 13 करोड़ की लागत से बना सॉलिड वेस्ट प्लांट कबाड़ हो रहा है। प्लांट चालू कराने के शासन के निर्देश के बावजूद सीएंडएस मरम्मत के लिए इस्टीमेट नहीं बना रहा है। तीन महीने पहले डीएम के निर्देश पर नगर पालिका ने सीएंडएस को इस्टीमेट बनाने के लिए पत्र लिखा था। इस्टीमेट बनाना तो दूर अभी तक तकनीकी टीम ने प्लांट का सर्वे तक नहीं किया है। 15वें वित्त की धनराशि से प्लांट की मरम्मत कराई जानी है।
नगर पालिका ने केंद्र सरकार की मदद से 2007-08 में कूड़े से खाद बनाने के लिए सॉलिड वेस्ट प्लांट का निर्माण कराया था। उस दौरान 13 करोड़ की धनराशि खर्च हुई थी। प्लांट तैयार होने के बाद चलाने की जिम्मेदारी एटूजेड कंपनी को दी गई थी।
संस्था को घर-घर जाकर कूड़ा इकट्ठा कर अपने संसाधनों से प्लांट तक ले जाकर खाद तैयार करनी थी। एग्रीमेंट के बावजूद एटूजेड ने कूड़े का उठान नहीं कराया। ऐसे में कुछ दिन तक नगर पालिका अपने संसाधनों से कूड़ा पहुंचाती रही। बाद में प्लांट के बिजली बिल भुगतान को लेकर निकाय और कंपनी के बीच मतभेद हो गए और प्लांट में ताला बंद कर कंपनी चली गई।
वर्ष 2012 से प्लांट में ताला बंद है। प्लांट के कीमती पुर्जे चोरी हो गए हैं। वर्तमान समय में प्लांट का सिर्फ ढांचा खड़ा है। नगर पालिका ने प्लांट परिसर में कूड़ा डंपिंग सेंटर बना दिया है।
डीएम ने दी है प्लांट चलाने की मंजूरी
शासन ने कूड़ा निस्तारण की बढ़ती समस्या को देखते हुए पूरे प्रदेश की निकायों में लगे सॉलिड वेस्ट प्लांट चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए 15वें वित्त से धनराशि खर्च करने के आदेश भी दिए गए हैं। मार्च में प्लांट चलाने के डीएम की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है।
डीएम ने प्लांट की मरम्मत कराने के लिए संस्तुति भी कर दी है। नगर पालिका ने मार्च के अंतिम सप्ताह में सीएंडएस को प्लांट की मरम्मत में आने वाले खर्च का इस्टीमेट बनाने के लिए पत्र भेजा था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है।
बिल भुगतान को लेकर नहीं बनी थी सहमति
सॉलिड वेस्ट प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 72 टन कूड़ा निस्तारण की है। 2008 में शहर से सिर्फ 52 टन कूड़ा निकल रहा था। ऐसे में भी प्लांट के संचालन में दिक्कत हो रही थी। प्लांट बंद होने का एक कारण यह भी है। इसके अलावा बिजली बिल को लेकर निकाय और एटूजेड कंपनी में सहमति नहीं बन पाई।