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ऑक्सीजन खत्म, निजी खर्चे से मंगवाए सिलेंडर

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फतेहपुर। देशव्यापी ऑक्सीजन संकट का असर जिले के अस्पतालों में भी दिखने लगा है। रविवार की सुबह जिला अस्पताल में पाइप लाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई। जिस वक्त ऑक्सीजन की किल्लत हुई उस वक्त 83 मरीज ऑक्सीजन पर थे।
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इसकी जानकारी होते ही तीमारदारों में अफरा तफरी मच गई। लोगों ने महंगे दामों पर ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर किसी तरह मरीजों की जान बचाई। सौंरा स्थित प्लांट से 13 जंबो सिलिंडर आने पर आठ घंटे बाद शाम साढ़े चार बजे पाइप लाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति चालू हुई।
कोरोना संक्रमण के दौर में जिस तरह के हालात बन पड़े हैं, उससे अस्पतालों में भी जिंदगी सलामत नजर नहीं आ रही है। हालात किस कदर खराब है, इसका अंदाजा सरकारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को देखने से पता चलता है। 120 बेड की क्षमता वाले जिला अस्पताल में पाइप लाइन से रोगियों को ऑक्सीजन देने की सुविधा है। इसके अलावा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर के जरिए भी मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती है।
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रविवार की सुबह 8:30 बजे सेंट्रलाइज पाइपलाइन से पुरुष, महिला और बच्चा वार्ड के मरीजों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सेंट्रलाइज पाइपलाइन को आपूर्ति करने वाले सिलेंडरों में ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। सिलेंडर खाली होने से ऑक्सीजन आपूर्ति रुक गई, जिससे कई मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। तीमारदारों में अफरा तफरी मच गई। किसी तरह उन्होंने महंगे दामों पर ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की और मरीजों की जान बचा सके।
हथगाम कस्बे के रईस अहमद को परिवार के लोग आज ही लेकर आए थे। इनका ऑक्सीजन लेबल 66 था। ऑक्सीजन आपूर्ति रुक जाने से रईस की तकलीफ बढ़ गई। बेटे महबूब आलम को अस्पताल स्टाफ के सामने गिड़गिड़ाते देखा गया। गाजीपुर कस्बे के गोरे सिंह शनिवार की शाम सांस लेने में दिक्कत होने पर भर्ती कराए गए थे।
ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से दिक्कत अचानक बढ़ी। बेटे आकाश सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल ऑक्सीजन मुहैया कराने से हाथ खड़े कर लिए। इस पर निजी सिलेंडर की व्यवस्था करनी पड़ी। शहर के बक्सपुर के रहने वाले वासुदेव के परिजन भी निजी खर्चे पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचे।
सुबह तक फिर खड़ी हो सकती है किल्लत
जिला अस्पताल में रविवार को सौंरा के प्लांट से 13 जंबो सिलेंडर उपलब्ध हुए। एक बार सिस्टम चलाने पर चार सिलेंडर की खपत होती है। यह सिलेंडर भी सिर्फ पौने दो घंटे या दो घंटे तक चलते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो देर रात तक यहां पर एक बार फिर पाइप लाइन से ऑक्सीजन ापूर्ति पर ब्रेक लग सकता है।
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