फतेहपुर। शहरवासियों को दूषित पानी की समस्या से निजात मिलेगी। पुरानी और जर्जर वाटर लाइन बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ढाई करोड़ रुपये का डीपीआर बनाकर भेजा जा चुका है। शहर में कुल 140 किमी लंबी वाटर लाइन में 25 किमी पुरानी लाइन दशकों पुरानी हैं। यह वाटर लाइन अक्सर लीकेज होती रहती हैं।
शहर में दूषित जलापूर्ति होने की पुष्टि 2008 में हुई थी। शहर के इमिलिबाग मोहल्ले में संक्रामक बीमारियों से चार लोगों की मौत होने पर लखनऊ से आई टीम ने शहर के 16 स्थानों से पीने के नमूने लिए थे। यह सभी नमूने जांच में फेल हो गए थे। टीम ने शुद्ध पानी की आपूर्ति करने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट के आधार पर नगर पालिका ने आनन फानन सभी नलकूपों में माइक्रो इलेक्ट्रानिक डोजर लगाए थे। डोजर समस्या के समाधान में कारगर साबित नहीं हुए।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार ने केंद्र और राज्यांश से पुरानी और जर्जर वाटर लाइनें बदलने का डीपीआर तैयार कराया है। शहर में 25 किमी वाटर लाइन 10 साल से लेकर 50 साल तक पुरानी हैं। 10 साइज की वाटर लाइनें बिछी हुई हैं। इनमें 16 से लेकर दो इंच तक की वाटर लाइनें हैं। इनकी कुल लंबाई 140 किमी है।
अधिशासी अभियंता जलनिगम एके श्रीवास्तव ने बताया कि पुरानी और जर्जर लाइनें बदलने की शासन की योजना है। जर्जर लाइनों की जगह 25 किमी नई लाइनें बिछाने का डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा गया है। करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च आएगा।