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अब गांव में रहकर तलाशी जाएंगी भविष्य की संभावनाएं

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फतेहपुर। रोजी रोटी के लिए महानगरों को पलायन करने वाले एक बार फिर गांव का रुख कर चुके हैं । वैश्विक महामारी के जो हालात हैं उसे देखते हुए प्रवासियों ने गांव में ही रहकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने की ठानी है । इनका कहना है कि अब बाहर जाने का कोई मतलब नहीं रहा । उनके लिए उनका गांव ही उनका देश है । मलवा ब्लाक के मंजू पुर गांव के आश्रय स्थल मैं क्वारंटीन किए गए राम सजीवन के बेटे नीरज का कहना है कि वह 4 दिन पहले कर्नाटक से आया है । वहां पर आइसक्रीम की फैक्टरी पर काम करता था । जो हालात हैं वह बाहर जाने की इजाजत नहीं देते । वह गांव में ही रह कर इस धंधे के जरिये वक्त की रोटी का जुगाड़ करेगा । इसी के साथी जगरूप के बेटे विजयपाल भी कुछ ऐसी ही सोच रखते हैं। विजयपाल का कहना है कि महानगरों में अब काम मिलना आसान नहीं रहा। ऐसे में उसका गांव ही उसकी किस्मत संवारने का काम करेगा। वह यहीं पर रहकर कोई दूसरा धंधा करेगा। इब्राहिमपुर नवादा के संतोष कुमार भी सूरत कमाते रहे हैं। लॉकडाउन लगने की वजह से यह भी वापस लौट आए। अब यह गांव में खेती करेंगे ।
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