बिंदकी। एक दशक से अधूरे बिंदकी बाईपास को चालू कराने के लिए अफसर गंभीर नहीं हैं। यही कारण है कि 10 साल में प्रशासन किसानों की जमीन का सर्किल रेट ही निर्धारित नहीं कर पाया है। इन्हीं वजहों से अभी तक बाईपास पूरा करने के प्रयास सफल नहीं हो पाए हैं।
साल 2011 में साढ़े आठ करोड़ की लागत बनने वाले बिंदकी बाईपास के पूरा न होने के पीछे राजस्व विभाग बड़ी वजह बना हुआ है। सर्किल रेट से भुगतान की मांग कर रहे किसानों की जमीन का अभी तक रेट तक तय नहीं हो पाया है। ऐसे में किसान अपनी जमीन छोड़ने के तैयार नहीं हैं।
विवादित जमीन जाफराबाद ग्राम पंचायत क्षेत्र में है या नगरपालिका क्षेत्र में। इसका भी निर्धारण नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि पहले यह तय हो कि उनकी जमीन ग्रामीण क्षेत्र में है या फिर नगरीय क्षेत्र में है। जब यह पता हो जाएगा तब इसका सर्किल रेट तय होगा। लेकिन अफसर इन 10 सालों में यह दोनों काम नहीं कर पाए हैं।
खास बात तो यह है कि जाफराबाद ग्राम पंचायत क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री में नगर पालिका बिंदकी विकास शुल्क के नाम पर सर्किल रेट का दो प्रतिशत वसूल रहा है। इसको लेकर 10 सालों से किसानों और प्रशासन के बीच तनातनी बनी हुई है। नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्र की जमीन का मुआवजा सर्किल रेट का चार गुना और नगर पालिका क्षेत्र की जमीनों का मुआवजा सर्किल रेट का दो गुना देने का प्रावधान है। इसी बात को लेकर जमीन का पेंच फंसा हुआ है। बाईपास न बनने के कारण खामियाजा बिंदकी नगर वासियों को भुगतना पड़ रहा है।