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दो लिपिकों से सीबीआई ने की तीन घंटे पूछताछ

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फतेहपुर के खनन आफिस में दस्तावेज खंगालते सीबीआई के अधिकारी। - फोटो : FATEHPUR
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अवैध मौरंग खनन पट्टों की जांच में जुटी सीबीआई टीम नौ दिन बाद फिर आई है। टीम ने सदर, बिंदकी और खागा तहसील से कुछ पत्रावलियों जुटाई हैं। कलक्ट्रेट में तैनात दो कर्मचारियों से तीन घंटे लंबी पूछताछ की है। सूत्र बताते हैं कि लिपिकों ने कई राज उगले हैं।
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बताया है कि किस तरह सत्ता के संरक्षण में जिले में अंधाधुंध अवैध तरीके से मौरंग खनन हुआ। इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे इसकी भी जानकारी सीबीआई को दी है। बिंदकी नायब तहसीलदार सीबीआई के पास कुछ दस्तावेजों को लेकर पहुंचे हैं। उनका भी टीम ने अवलोकन किया है।
बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर में सपा शासनकाल के दौरान 2012 से 2017 तक हुए अवैध मौरंग पट्टों की जांच में जुटी सीबीआई पांचवीं बार जिले में पहुंची। सीबीआई टीम सोमवार देर शाम आई। टीम ने पहले कलक्ट्रेट में तैनात दो वरिष्ठ लिपिकों से पूछताछ की। करीब तीन घंटे तक पूछताछ चली।
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कई अहम जानकारी निकल कर सामने आई हैं। सत्ता के संरक्षण में मौरंग खनन का अवैध खेल की जानकारी इन लिपिकों ने भी दी है। सीबीआई इन दोनों लिपिकों को सरकारी गवाह भी बना सकती है। यह दोनों लिपिक 2012 से 2017 के मध्य खनन विभाग में ही तैनात थे। लिपिकों ने खनन में शामिल सिंडीकेट के बारे में भी जानकारी दी।
सीबीआई ने लोकल के सिंडीकेट की भी जांच शुरू की है। लोकल सिंडीकेट में खागा और बिंदकी तहसील के लोग भी शामिल थे। बिंदकी के एक मौरंग माफिया की अकूत संपत्ति की भी जांच शुरू की है। कुछ सालों में अकूत संपत्ति का मालिक बनने वाला माफिया टेंपो स्टैंड का संचालक था।
मौरंग कारोबार से जुड़ने के बाद बिंदकी की एक चर्चित कोठी का मालिक हो गया। लग्जरी वाहनों की कतारें लग गईं। उसकी संपत्तियों की जांच के लिए सीबीआई टीम ने तहसील प्रशासन से ब्यौरा जुटाया है। ऐसे ही खागा का एक सफेदपोश नेता भी खनन से जुड़ा है।
उसका भी ब्यौरा तहसील से जुटाया जा रहा है। सदर तहसील से भी मौरंग माफिया का डाटा निकाला जा है। मंगलवार को टीम खनन कार्यालय में पूरे दिन अभिलेखों की जांच में जुटी रही।
बता दें कि मौरंग खनन के पट्टों पर सुप्रीम कोर्ट ने ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू की थी। ई-टेंडरिंग के बजाय 2012 से 2014 के बीच जिले में तीन ऐसे मौरंग पट्टों का नवीनीकरण कर दिया गया जो पूर्व में कैंसिल किए जा चुके थे। कैंसिल होने के बाद इनका नियमों को दरकिनार कर नवीनीकरण किया गया।
2012 से 2017 तक अवैध तरीके से इन पट्टों पर खनन हुआ। इस मामले की शिकायत पर हाईकोर्ट ने बांदा, हमीरपुर और जिले के मौरंग पट्टों की जांच के लिए सीबीआई को आदेश दिए थे। तीन साल से पट्टों की जांच में सीबीआई जुटी है।
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