फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झुलसा रोग से आलू की फसल को बचाएं किसान

विज्ञापन
विज्ञापन
मौसम में हो रहे उतार चढ़ाव के कारण आलू की फसल में झुलसा रोग की संभावना बढ़ गई है। जिल उद्यान विभाग ने फसल को इस रोग से बचाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन

जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह ने बताया कि बदली, बूंदाबांदी और नम वातावरण में अगेती और पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है।
अगेती झुलसा रोग फसल को भारी क्षति पहुंचता है। ऐसी स्थिति में आलू उत्पादकों को सलाह दी जाती है कि आलू की अच्छी पैदावार के लिए फसल के बचाव पर ध्यान दें।
अगेती झुलसा रोग का प्रकोप पत्तियों से प्रारंभ होता है, जिसके फलस्वरूप पत्तियों पर गहरे भूरे और काले रंग के कुंडलाकार धब्बे बनते हैं। प्रभावित निचली पत्तियां सूख कर गिर जाती हैं।
विज्ञापन

पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से आलू की फसल को विशेष क्षति होती है। इस रोग से पत्तियां सिरे से झुलसना प्रारंभ होती हैं जो तेज गति से फैलता है। 2 से 4 दिनों के अंदर ही पूरी फसल नष्ट हो जाती है। बदली में 90 प्रतिशत से अधिक आर्द्र वातावरण एवं कम तापमान पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है।
ऐसे बचाएं फसल
आलू की फसल को अगेती झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैगजीन कार्बोनेट 2 से 2.5 किलोग्राम को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर पहला छिड़काव करें। बुआई के 30-45 दिन बाद यह छिड़काव अवश्य किया जाए। रोग के नियंत्रण के लिए दूसरा एवं तीसरा छिड़काव कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 2.5 से 3 किलोग्राम अथवा जिंक मैगजीन करबामेट 2 से 2.5 किलोग्राम में से किसी एक रसायन का चयन कर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10 से 12 दिनों के अंतर पर छिड़काव करें। दूसरे एवं तीसरे छिड़काव के साथ ही माहू कीट का नियंत्रण आवश्यक है, क्योंकि इसके प्रकोप से आलू बीज उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए दूसरे व तीसरे में फफूंदनाशक के साथ कीटनाशक रसायन जैसे डायमेथोएट 30 ईसीए या मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 ईसी एक लीटर अथवा मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी 750 मिली को प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें