कीचड़ में कमल खिलता है। यह सच कर दिखाया है कि चकीया गांव के लघु किसान रामचंद्र सिंह के बेटे रंजीत सिंह ने। इस मेधावी ने यूपी एग्रीकल्चर की संयुक्त परीक्षा में अव्वल स्थान हासिल किया है। मेधावी के पिता का कहना है कि बेटा बंगलुरू में वेटनरी साइंस का प्रशिक्षण ले रहा है।
चकीया गांव निवासी रामचंद्र सिंह का बड़ा बेटा रंजीत सिंह बीएससी करने के बाद दो साल से बंगलुरू से वेटनरी साइंस का प्रशिक्षण ले रहा हैं। साधारण और सात बीघे जमीन वाले किसान पिता रामचंद्र सिंह के घर में जन्मे इस मेधावी की सफलता से पूरा परिवार गदगद है।
फोन पर जब पिता रामचंद्र से पूछा गया, तो उसे सहज में विश्वास नहीं हुआ और वह अवाक रह गए। पच्चीस वर्षीय इस मेधावी की सफलता पर मां सुशीला देवी फूली नहीं समा रही हैं। पिता ने बताया कि सात बीघे जमीन में रात दिन मेहनत करके फसलें उगाई और उसी से किसी तरह तीनों बेटों की पढ़ाई लिखाई कराई है।
यूपी में अव्वल स्थान हासिल करके बेटे रंजीत ने उनका सीना गर्व चौड़ा कर दिया है। बताया कि उनका दूसरे नंबर का बेटा अमरजीत सिंह इलाहाबाद में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है, जबकि सबसे छोटा भाई अजीत सिंह ने अमर शहीद कंचन सिंह महाविद्यालय से बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
डॉ भीमराव अंबेडकर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा, चौ. चरण सिंह कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय मेरठ, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय फैजाबाद, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर को मिलाकर चारों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से प्रवेश परीक्षा कराते हैं। इनमें एग्रीकल्चर बीएससी, एमएसी व पीचडी में प्रवेश लेने के लिए परीक्षार्थी शामिल होते हैं। प्रदेश के चारों एग्रीकल्चर विश्वविद्यालयों की संयुक्त परीक्षा में जिले के इस मेधावी रंजीत सिंह ने अव्वल स्थान हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया है।