फतेहपुर। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में बोर्ड परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सत्र समापन के करीब पहुंच रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के राजकीय स्कूलों में विषय शिक्षक नहीं हैं। पाठ्यक्रम की शुरुआत नहीं हो पाई है। इससे इतर निजी स्कूलों में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को शिक्षकों ने पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति कराना शुरू कर दिया है। ऐसे में राजकीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विद्यार्थियों को चार साल की बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्रों से अभ्यास करने की सलाह दी जा रही है।
जिले में पंडित दीन दयाल माडल राजकीय इंटर कालेज के नाम से दनियालपुर, बहुआ, अंबिलिहा पाल, ऐलई, लतीफपुर, अलादादपुर के नाम से संचालित हैं। इनके अलावा राजकीय माध्यमिक कुसुंभी, टीकर, इजूरा खुर्द, सिठियानी, टेनी, मोहम्मदाबाद, ऐरई, रावतपुर, चककाजीपुर, बिसौली, सिजौली, अजमतपुर, लंहगी, सिक्रोढी, कोर्राकनक, पहाडीपुर, लालपुर दरौटा और सरकंडी में संचालित हैं। विज्ञान वर्ग में संचालित इन स्कूलों में किसी में
भी एक से अधिक शिक्षक की तैनाती नहीं है। ज्यादार स्कूलों में दूसरे स्कूलों के कलावर्ग के शिक्षक संबद्ध करके काम चलाया जा रहा है। ऐसे में यहां पढने वाले दो हजार परीक्षाथियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। बच्चों की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक तक सिमटकर रह गई है। यही कारण है कि इन स्कूलों में छात्र उपस्थिति भी बहुत कम
रहती है। बोर्ड परीक्षा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, छात्र-छात्राओं की चिंता बढ़ रही है। ऐसे में साफ है कि राजकीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को सिर्फ किताबी ज्ञान पर ही बोर्ड परीक्षा में बैठना पड़ेगा।
भौतिक विज्ञान विशेषज्ञ उदय प्रभात और गणित के शिक्षक राजेंद्र सिंह का कहना है कि बिना शिक्षक के पढ़ाए वैसे तो ज्ञान अधूरा होता है, लेकिन पढ़ने वाला बच्चा कम नंबरों से सही, लेकिन बोर्ड परीक्षा पास ही कर सकता है। दोनों शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय है। ऐसे परीक्षार्थियों को चाहिए की चार साल की बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र लेकर उन्हें हल करने का अभ्यास करें। इससे उन्हें बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए बहुत कुछ हासिल हो सकता है।