फतेहपुर। जिले में एज (छोटा) डाटा सेंटर बनाने की तैयारी की जा रही है। साल 2026 तक डाटा सेंटर तैयार हो जाएगा। इससे फाइव जी का तेजी से विस्तार होगा। वहीं, डाटा लेटेंसी (अवरोध) यानी काल ड्राप की समस्या से मुक्ति मिलेगी। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा मिलेगा।
सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से विस्तार के साथ डाटा सेंटर का महत्व बढ़ा है। मेट्रो सिटी में हाइपर स्केल में डाटा सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश के सभी जिले में भी डाटा सेंटर तैयार करने की योजना बनाई गई। इसके तहत एज डाटा सेंटर तैयार किए जा रहे हैं, जो कम जगह और कम लागत में बन रहे हैं। जिले में भी कम से कम एक एज डाटा सेंटर खोलने की तैयारी है। इसके लिए जमीन की तलाश जारी है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने हर जिले में डाटा सेंटर बनाने के लिए व्यूनाव इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ 13500 करोड़ रुपये का एमओयू किया है। जिले में 750 एज डाटा सेंटर बनाने हैं। जिले की आबादी और मोबाइल यूजर्स के अनुसार पांच से 10 डाटा सेंटर एक -एक जिला में खोलने की योजना है। यह ब्लॉक स्तर तक खोले जाएंगे।
ये होगा फायदा
- ड्रोन से खेतों में खाद व कीटनाशक दवाओं के छिड़काव में मदद मिलेगी। वर्तमान में हमेशा मोबाइल कनेक्टिविटी में अवरोध उत्पन्न होता रहता है। इससे क्षेत्र के चयनित स्थल पर छिड़काव न होकर अन्य स्थल पर होने की आशंका बनी रहती है। डाटा मजबूत होने से अवरोध खत्म होगा और सौ फीसदी चयनित क्षेत्र पर ही छिड़काव होगा।
- मोबाइल से अभी बात करते समय हमेशा कट-कटकर बात होती है। डाटा सेंटर स्थापित होने से सर्विस में अवरोध खत्म होगा। लोग निर्बाध बातचीत कर सकेंगे।
- पुलिस की इंटीलिजेंस नेटवर्क का काम तेजी से होगा। मोबाइल ट्रैकिंग में तेजी से काम होगा।