दहेज न मिलने पर पत्नी को मौत के घाट उतारने वाले पति को अदालत ने दस वर्ष कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मुल्जिम के खिलाफ 1500 रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
यह घटना सात जुलाई 2010 की है। शाह के रहने वाले महेश ने अपनी बेटी उमा की शादी कोराई के रहने वाले उमाकांत के साथ पांच मई 2009 को की थी। शादी के बाद पति उमाकांत दहेज में मोटरसाइकिल और सोने की जंजीर मांग करता था। मांग पूरी न होने पर उमा देवी को मारता पीटता था।
उमाकांत ने सात जुलाई 2010 को पत्नी को पहले मारापीटा और हत्या कर दी। बाद में शव को अस्ती रेलवे लाइन के किनारे फेंक दिया था। घटना की जानकारी होने के बाद मृतका की मां गीता देवी ने धारा 304 बी और 498 ए में रिपोर्ट लिखाई थी।
जीआरपी में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद फिर विवेचना के दौरान रिपोर्ट सदर कोतवाली स्थानांतरित हुई। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट वेदपाल सिंह ने मामले की सुनवाई की। शासकीय अधिवक्ता प्रमिल कुमार श्रीवास्तव ने अभियुक्त के खिलाफ दलीलें और सबूत पेश किए। इस पर पति को दोषी मानते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई है। अधिवक्ता ने बताया कि घटना के बाद से पति जेल में हैं, जिसकी जमानत नहीं हुई।