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जिले में मोदी के स्वच्छ भारत मिशन अभियान की सफलता पर संदेह

Sun, 14 Jun 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, फतेहपुर।
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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. विशभननाथ प्रताप सिंह के सियासी क्षेत्र फतेहपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के सफल होने में संदेह पैदा हो रहा है।
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स्वच्छ मिशन के तहत जिले में कोई भी कार्य अब तक नहीं हुआ है। बानगी के तौर पर जिला मुख्यालय  में बने पेशाबघर और शौचालय लोगों को बीमारी दे रहे हैं। वैसे तो ज्यादातर इनकी कमी है।

लोग राह चलते सड़क किनारे खड़े हो जाते हैं। खासकर महिलाओं को इस समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। नगर पालिका प्रशासन और जिला प्रशासन का रवैया गैरजिम्मेदारी भरा है।
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शहर में फिलहाल चार सुलभ शौचालय हैं। यह सदर अस्पताल, आदर्श रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस स्टाप, गणेश शंकर विद्यार्थी चौराहा के पास हैं।

सदर अस्पताल के  सुलभ शौचालय पर करीब दशक से ताला लगा है।  जबकि राजकीय परिवहन निगम के बस स्टाप का सुलभ शौचालय भी बंद है।

ऐसी स्थिति में दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को इस जरूरत के नाम पर परेशान होना पड़ रहा है। सिर्फ कलेक्ट्रेट के पास स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी चौराहा में बना सुलभ शौचालय या फिर आदर्श रेलवे स्टेशन का सहारा लेना पड़ता है।

30 वार्ड में बमुश्किल आधा दर्जन भी मूत्रालय न होने से राहगीरों को खुले स्थान पर लघुशंका करना मजबूरी है। इस समस्या से सबसे ज्यादा महिलाओं को जूझना होता है।

महिलाओं के लिए लघुशंका का मुफीद ठिकाना न होने से उन्हें या तो खुले स्थलों में शर्मसार होना पड़ता है या फिर घर लौटने तक इंतजार करना पड़ता है। नजीर के तौर पर शहर की चौक बाजार में रोजाना हजारों महिलाएं खरीदारी को पहुंचती हैं। 

नगर पालिका परिषद के पास चार प्लास्टिक के पेशाबघर हैं। लेकिन इनका उपयोग वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान ही किया जाता है।

बीते महीनों में फतेहपुर महोत्सव के दौरान देखे गए यह मूत्रालय फिलहाल नगर पालिका कैंपस में शो-पीस बना करके खड़े कर दिए गए हैं। नजीर के तौर पर 10 से 12 जून तक चले नासिरपीर बाबा के उर्स व मेले में शिकरत करने आईं महिला वर्ग को लघुशंका के लिए इरीगेशन कैंपस का रुख करना पड़ा।  

वरिष्ठ परामर्शदाता, सदर अस्पताल‘- डॉ. विवेक निगम ने कहा कि शरीर के अंदर ज्यादा समय तक यूरीन को रोकना खतरे से खाली नहीं। यूरीन को अधिक समय तक रोकने पर यूरीन थैली कमजोर पड़ने लगती है। यह स्थिति बीमारी से सीधी जुड़ी होती है। जबकि खुले में लघुशंका करने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है’।
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