बिंदकी। खागा में हुए हादसे में दिवंगत हुए रामकिशोर बेटे की नौकरी लगने से पहले मजदूरी करते थे। बेटा अमर सिंह पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी पा ले इसके लिए उन्होंने कठिन मेहनत की। इसी मेहनत का परिणाम रहा कि अमर सिंह को रेलवे में इलेक्ट्रीशियन के पद पर नौकरी मिल गई।
ग्रामीणों ने बताया कि अमर सिंह ने कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई गांव के ज्ञान शिशु विद्यालय से की। इसके बाद वह कक्षा छह से 12 तक शिक्षा के लिए नेहरू इंटर कॉलेज बिंदकी पहुंचे। इंटर पास करने के बाद अमर सिंह ने फतेहपुर से आईटीआई की और वर्ष 2006 में रेलवे में इलेक्ट्रीशियन बन गए। नौकरी करने के बाद पिता ने मजदूरी करना बंद कर दिया। पैसे आने शुरू हुए तो अमर सिंह
पिता को अपने साथ कानपुर ले आए। तब से वह पिता को अपने साथ ही रखते थे। झावरखेड़ा गांव में उनका मकान है। जहां वह आते-जाते रहते थे। गांव में उनके चाचा रविशंकर, चाची सुनीता, उनके बेटे अभिषेक, अजीत, बेटी अल्का, वंदना हैं। जो उनके घर की देखरेख करती हैं। हादसे की खबर जब उन्हें मिली तो पूरा परिवार बिलखने लगा।