गिरधर गोपाल के दर्शन को भक्त परेशान हैं, लेकिन भगवान अभी पुलिस की ‘हिरासत’ में हैं। भक्तों को उनके दर्शन के लिए इंतजार करना होगा। भगवान को पुलिस कैद से मुक्ति में कानूनी अड़चन आ रही है। ऐसे में मंदिर सूना है तो भक्त दर्शन के लिए बेताब हैं। भक्तों का कहना है कि पुलिस जल्दी से कानूनी प्रक्रिया पूरी करे और भगवान को मंदिर में स्थापित कराए।
ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी शिवराजपुर के मंदिर में मीराबाई ने भगवान गिरधर गोपाल की मूर्ति स्थापित किया। यहां प्रतिदिन भक्तों की भीड़ जुटने लगी।
पांच अप्रैल को मूर्ति तस्करों ने बेशकीमती गिरधर गोपाल की मूर्ति चुरा ली। चोरों ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचने की नीयत से मूर्ति को खेत में छुपा दिया।
कई दिनों की खोजबीन के बाद पुलिस ने मूर्ति को बरामद किया। सूत्रों की मानें तो चोरों ने गिरधर गोपाल की मूर्ति की बंशी को काट दिया है।
इसके पीछे आशंका जताई जा रही है कि बंशी काट कर उसकी कीमत का आकलन किया गया है। फिलहाल मूर्ति को अभी औंग थाने के मालखाने में रखवाया गया है।
पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मूर्ति मंदिर में रखवाई जा सकती है। उधर मूर्ति मिलने के बाद से ही भक्त दर्शन के लिए व्याकुल हैं
इस संबंध में औंग थानाध्यक्ष साधूराम यादव का कहना है कि मूर्ति बरामद हो गई है। चोरों को पकड़ने के लिए पुलिस अभियान चला रही है। कोर्ट की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मूर्ति मंदिर में स्थापित करा दी जाएगी।
मूर्ति चोरी में सफेदपोश के जुड़े होने का शक
सूत्रों की मानें तो मूर्ति चोरी करने आए बदमाशों ने स्कार्पियों का प्रयोग किया था। यह भी सुराग मिला है कि चोरी में प्रयुक्त स्कार्पियों एक सफेदपोश की है। ऐसे में आशंका है कि पूरे मामले में किसी न किसी रूप में सफेदपोश का भी हाथ है
यही वजह है कि पुलिस पूरे मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। इस घटना के बाद ही तत्कालीन एसओ अजय सेठ का गैरजनपद तबादला हो चुका है। मूर्ति बरामदगी के बाद से पुलिस चोरों का सुराग लगाने में जुटे होने का दावा कर रही है, लेकिन पुलिस की ढिलमंगई साबित कर रही है कि मामले को किसी न किसी रूप में टरकाया जा रहा है.
क्या कहता है कानून
‘कानूनी प्रक्रिया के तहत चोरी का मुकदमा दर्ज होने के बाद किसी भी संपत्ति को न्यायालय में पेश करना होता है। शिवराजपुर मंदिर से चोरी के बाद बरामद हुई मूर्ति को न्यायालय के समक्ष पेश करना होगा। अदालत के आदेश पर ही मूर्ति को मंदिर में स्थापित कराया जा सकता है।’- ब्रजेश शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता
पहले भी हुई थी चोरी
इससे पहले 2003 में भी इस मूर्ति को चोरी किया गया था और मूर्ति की आंख और पीठ का कुछ हिस्सा काट लिया था। मूर्ति ब्लैक स्टोन की बनी है। बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करोड़ों में है।