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माता दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की हुई पूजा

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फतेहपुर। चैत्र नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा-अर्चना हुई। माता को धूप, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य चढ़ाकर पूजा की गई। मां कालरात्रि का प्रिय पुष्प रातरानी है। इस फूल को पूजा में रखा गया। इसके बाद मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप के बाद आरती की।
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नवरात्र के सातवें दिन यानी, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर भक्तों में अपने-अपने घरों में पूजा की। साथ ही देश में फैले कोरोना वायरस के संक्रमण से राहत दिलाने की मां से प्रार्थना की। आरती के समय भक्तों ने शंख और घंटी बजाई। आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि मां कालरात्रि की पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस वजह से मां कालरात्रि को शुभंकरी के नाम से भी पुकारा जाता है। मां कालरात्रि की पूजा करने से आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है।
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घर में पूजा कर, करें दान
आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने कहा कि इस समय कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन चल रहा है। मां के भक्त सप्तमी, अष्टमी और नवमी को कन्या भोज कराते हैं। कन्या भोज के ही माता की पूजा संपन्न की जा सकती है। इसके लिए श्रद्धालु अपने घर में माता की पूजा कराने के बाद ब्राह्मण व कन्याओं को दान दें। इसमें मुद्रा, वस्त्र, अनाज का दान कर सकते हैं।
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