मां शेरावाली के जयकारों से जहां मंदिर गूंज रहे हैं वहीं घरों में मां की आराधना करने का सिलसिला जारी है। मां के छठे स्वरूप कात्यायनी की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई।
लोगों ने घरों में कन्याओं को भोज कराकर दक्षिणा दिया।
शहर के दुर्गा मंदिर में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। यहां श्रद्धालुओं ने मां के सभी नौ स्वरूपों के दर्शन किए। महिलाओं ने देवी गीतों से मां को प्रसन्न किया।
मां कात्यायनी कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर देती हैं। कन्याओं ने देवी मां के छठे स्वरूप कात्यायनी का विधि विधान से पूजा कर मनचाहे पति की कामना की। देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए महर्षि कात्यायनी के आश्रम में जन्मी कन्या का नाम कात्यायनी पड़ा।
भक्तों ने मां का गंगाजल से स्नान कराया और चमेली का तेल लगाया। इसके बाद ओम कात्यायनी देब्यै नम: मंत्र का जाप किया। इसी प्रकार कालिका मंदिर, भुइयां देवी और शीतला मंदिर में दिनभर भक्तों की भीड़ रही।
आराधना से अकाल मृत्यु नहीं होती
फतेहपुर। आचार्य पंडित दुर्गादत्त शास्त्री और आचार्य पंडित केके पांडेय ने बताया कि मां का सातवां स्वरूप कालरात्रि का है। काल को जीतने वाली मां कालरात्रि की आराधना से अकाल मृत्यु नहीं होती। सृष्टि संयोजन और संचालन काली जी की कृपा का फल है। जिन वस्तुओं और प्राणियों से जीव दूर भागता है वह काली को प्रिय है। असुरों का नाश करने वाली माता काली की आराधना जितनी सरल उतनी कठिन है। मां को नीले फूल की मालाएं और काले अंगूर बहुत प्रिय हैं। ओम काली देव्ये नम: मंत्र के जाप से देवी मां प्रसन्न होती हैं।