फतेहपुर। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति बिजली कर्मचारियों ने अधीक्षण अभियंता दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने पावर कारपोरेशन प्रबंधन पर औद्योगिक अशांति फैलाने का आरोप लगाते हुए हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल करने की मांग की।
इंजीनियर जितेंद्र कुमार, इंजीनियर महेश चंद्र ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पहले संविदा कर्मियों को हटाकर भय का वातावरण बनाया जा रहा है। निजीकरण के बाद दिल्ली में एक साल के अंदर लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वीआरएस लेने के लिए मजबूर किया गया था। इसी प्रकार एक फरवरी को चंडीगढ़ विद्युत विभाग का निजीकरण करने के पहले 200 से अधिक बिजली कर्मियों को वीआरएस लेने के लिए बाध्य किया गया। अकेले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों और 26 हजार नियमित कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटकी हुई है। बिजली कर्मी किसी भी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे। विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम 7 फरवरी को भी जारी रहेगा। इस मौके पर आदित्य त्रिपाठी, शुभम कश्यप, जयसिंह, धीरेंद्र सिंह सहित तमाम इंजीनियर मौजूद रहे। (संवाद)