पंजाब नेशनल बैंक सिविल लाइन में लगी भीड़।
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नोट की चोट घर के सबसे जरूरी जगह किचन पर पड़ गई है। पति की जेब कैश से लेस है तो गृहणी की किचन सामानों से लेस। दोनों नोटबंदी की दिक्कत से जूझ रहे हैं। किचन का बजट अस्त-व्यस्त हो गया है। इकठ्ठे की बजाय फुटकर में भी कम-कम खरीदारी हो रही है।
नाश्ता व खाने का मेन्यू बदल गया है। जहां डिब्बे भरे रहते थे, वे आज आधे से भी कम हैं। जैसे-तैसे कुशल गृहणियां काम चला रही हैं। बता दें कि नोटबंदी के 44वें दिन भी बैंकों में कैश की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है। बैंक काउंटर और एटीएम बूथ के बाहर घंटों लाइन लगाने के बाद दो से चार हजार रुपया ही मिल पा रहा है। ऐसे में जो पूंजी है उसी से घर गृहस्थी का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। कैशलेस व्यवस्था जिले में नाममात्र है।
बच्चों की स्कूल फीस, सब्जी, दूध, बिजली का बिल समेत तरह तरह के खर्चे हर महीने आते हैं लेकिन कैश कम होने से दिक्कतें हो रही हैं।