किमिदियापुर में शव के पास रोते बिलखते परिजन और जांच करती पुलिस
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सदर कोतवाली क्षेत्र के किमिदियापुर गांव में मजदूर चंद्र किशोर रैदास (36) का रविवार को शव मिलने से सनसनी फैल गई। शरीर पर चोटाें के निशान होने की बात कह परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने वीडियोग्राफी भी कराई है। इधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेड इंजरी से मौत निकली है।
चंद्र किशोर रैदास सदर कोतवाली क्षेत्र के उमरी गांव निवासी छेदीलाल के पुत्र थे। मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। इन दिनों वह गांव के ही रिटायर पुलिस कर्मी के किमिदियापुर में बन रहे मकान में मजदूरी कर रहा था। साथी मजदूरों ने बताया कि शनिवार को स्लैब पड़ने के बाद शराब पी गई। इसके बाद वे लोग घर चले गए थे। चंद्र किशोर ज्यादा नशे में था। रविवार सुबह दोबारा काम पर लौटे तो वहां चंद्र किशोर का शव पड़ा देखकर हैरान रह गए। उसकी आंख में चोट, कान से खून बह रहा था। पीठ पर भी चोटों के निशान थे। उन लोगों ने परिजनों को खबर दी। पत्नी रंजना ने आरोप लगाया कि मकान मालिक के गांव के ही होने के नाते पति की पुरानी जान पहचान थी। पति करीब एक माह से मजदूरी कर रहे थे। रंजना का आरोप है कि उसके पति की मकान मालिक व उसके लोगों ने मिलकर हत्या की है। उसकी बड़ी बेटी कल्पना को काफी दिनाें पहले पति के हत्यारोपियों ने मारापीटा था। इसे लेकर भी आरोपी खुन्नस मानते थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट लगने से चंद्र किशोर की मौत का मामला सामने आया है। इससे साफ हो रहा है कि चंद्र किशोर की किसी के साथ जमकर मारपीट हुई है। आरोपी ने उसके सिर में किसी वस्तु से प्रहार किया। बेहोश होकर गिरने पर आरोपी भाग निकले हाेंगे। दूसरी ओर मकान मालिक पक्ष का कहना है कि सारे मजदूरों ने स्लैब डालने के बाद घर से कुछ दूरी पर शराब पी थी। इसी दौरान गिरने से चंद्र किशोर बेहोश हो गया। उन्होंने मजदूराें से चंद्र किशोर के घर खबर पहुंचाने को कहा था। कोतवाल महेश पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ही छानबीन कर कार्रवाई होगी।
चंद्र किशोर निर्माणाधीन मकान से दस कदम की दूरी पर पूरी रात पड़ा रहा। इस दौरान आबादी के लोग, साथी मजदूरों और मकान मालिक सभी चले गए। अगर वह गिरा भी था तो किसी ने उसे घर पहुंचाने की कोशिश नहीं की। जबकि मकान मालिक भी उसके गांव के ही हैं।
घटना से चंद्र किशोर रैदास की पत्नी रंजना का रो-रो कर हाल बेहाल है। चंद्र किशोर अपने पीछे मासूम बच्चों कल्पना, खुशबू और पंकज को छोड़ गया है। चंद्र किशोर की मां श्यामकली बेटे के शव से लिपटकर रोती बिलखती रही है।