असोथर थाना क्षेत्र के पुरबुजुर्ग गांव में चुनावी रंजिश में रविवार को खून खराबे की नींव तीन दिन पहले ही पड़ गई थी। पुलिस ने मामले को हल्के में लिया था। इसके नतीजे के रूप में वारदात सामने आई। हालांकि पुलिस ने मारपीट को हत्या में तरमीम कर प्रधान समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
गांव में रविवार की सुबह चुनावी रंजिश को लेकर प्रधान चंदन पाल पक्ष और रूपनारायण पक्ष के बीच खूनी संघर्ष हुआ। इस मामले में रूपनारायण के भाई गेंदालाल की मौत के बाद पुलिस प्रशासन चौकन्ना हो गया है।
एसपी के आदेश पर फटाफट जानलेवा हमले के दर्ज मुकदमें को हत्या की धारा 302 में तरमीम किया गया है। थाना पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी करके निवर्तमान प्रधान और प्रत्याशी चंदन पाल, शिवभोले, योगेंद्र, रामबाबू और मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया है। कुल तेरह लोगों के खिलाफ रूपनारायण ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
खूनी संघर्ष के पीछे पुलिस को भी दोषी माना जा रहा है। तीन दिन पहले हत्यारोपी प्रधान पक्ष के अखिलेश के साथ रूपनारायण पक्ष की मारपीट हुई थी।
इसमें अखिलेश घायल हो गया था और उसने चाकू मारने के आरोप की तहरीर थाने में दी थी। लेकिन उसकी शिकायत पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। रूपनारायण ने बताया कि चाकू का आरोप गलत है।
अखिलेश के साथ मारपीट के बाद प्रधान पक्ष के लोगों ने शनिवार को मतदान के दौरान उसे धमकी दी थी। उसने बताया कि मतदान के बाद पूरे परिवार को देख लेने को कहा गया था।
उसने अपने भाई गेंदालाल को धमकी के बारे में बताकर आगाह भी किया था। पुलिस उसी समय दोनों पक्षों के बीच पनपे विवाद पर ठोस कदम उठाती, तो शायद घटना न होती। एसपी राजीव मल्होत्रा ने बताया कि तीन दिन पहले की उन्हें जानकारी नहीं है। जांच के दौरान कोई बात सामने आई तो थाना पुलिस पर भी कार्रवाई होगी।