यूपी-100 को सफल और निष्पक्ष बनाने के लिए अत्याधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया गया है। यही संसाधन औंग पीआरवी पर लगे आरोपों पर मुहर भी लगा सकते हैं। जिसके बाद उगाही के खेल का पर्दाफाश हो सकेगा। हाईवे पर मवेशियों के ट्रकों से वसूली के लग रहे आरोप का मामला भी गरमाया हुआ है।
औंग थाना क्षेत्र हाईवे पर तैनात रहने वाली यूपी-100 पीआरवी पर मवेशियों के ट्रकों से वसूली किए जाने का आरोप लगा था। उच्चाधिकारियों के आदेश पर सर्किल सीओ को जांच सौंपी गई है। हालांकि सीओ बिंदकी के चुनावी ड्यूटी पर जाने की वजह से जांच रफ्तार नहीं पकड़ सकी। खास बात यह है कि मामले की जांच के लिए अधिकारियों को मशक्कत करने की जरूरत नहीं है और न ही किसी के बयानाें की जरूरत है। सभी पीआरवी जीपीएस (ग्लोबल पोजीशन सिस्टम) से लैस हैं।
हाईवे पर उगाही करने वाली पीआरवी कई-कई घंटे फतेहपुर कानपुर सीमा पर खड़ी रहती थी। नियमानुसार पीआरवी को लगातार चिन्हित स्थानों पर भ्रमणशील रहना चाहिए। एक ही स्थान पर पीआरवी की मौजूदगी का लोकेशन कर्मियों के मकसद को साफ कर देता है। जांच अधिकारी को जीपीएस सिस्टम रिकार्ड खंगालने में पीआरवी का एक ही लोकेशन पर होना साफ हो सकता है, जो आरोप को सिद्ध करने के लिए पुख्ता सबूत माना जाएगा। सीओ आरके वर्मा ने बताया कि वह छह तारीख को लौटने के बाद मामले की जांच शुरू करेंगे।