जिला कारागार में दो साल से निरुद्ध बंदी राकेश (37) की मौत से गुस्साए परिजनों ने शुक्रवार को जेल के बाहर जमकर हंगामा किया। इस दौरान कई बार उनकी पुलिस से नोकझोंक भी हुई। उनका कहना था कि गुरुवार को जेल प्रशासन ने हार्ट अटैक से मौत बताई थी लेकिन शुक्रवार को पंचनामे में उसके शरीर पर चोटों के निशान मिले। वे प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों के समझाने पर पोस्टमार्टम को राजी हुए। तनाव को देखते हुए अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस-पीएसी मुस्तैद रही। उन्होंने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। एसपी ने उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
बंदी राकेश मलवां थाना क्षेत्र के नेवलापुर गांव निवासी रामदयाल का बेटा था। उस पर हुसैनगंज के एक गांव स्थित ससुराल में शराब के नशे में आठ साल से कम उम्र की दो बच्चियों से दुष्कर्म का आरोप लगा था। पुलिस ने उसे दो अप्रैल 2014 को गिरफ्तार किया था। तभी से वह जिला कारागार में बंद था।
गुरुवार को जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि बंदी ने दोपहर करीब 12 बजे सीने और पेट में दर्द की शिकायत की थी। उसका जिला कारागार के अस्पताल में इलाज कराया गया। रूटीन चेकअप के लिए जिला अस्पताल के चिकित्सक भी आए थे। बाद में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया था।
परिजनों ने शुक्रवार को जेल के बाहर हंगामा किया। उनका कहना था कि नायब तहसीलदार ने शव का पंचनामा भरा तो बंदी की पीठ और हाथ की कुहनी में चोटों के निशान मिले हैं। इससे साफ है कि उसे पीटकर मारा गया है। हंगामे की सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और समझा बुझाकर उन्हें पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया। यहां डाक्टरों ने पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। वीडियोग्राफी भी हुई।
इस दौरान सड़क पर भाई मुकेश, पत्नी व बेटियां किरन व रोशनी रोते-बिलखते रहे। उन्होंने जेलर व जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया। परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी से भी मुलाकात की। एसपी ने उन्हें निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हंगामे के दौरान एसडीएम विवेक श्रीवास्तव, सीओ सिटी समर बहादुर, कोतवाल आरके पांडेय व पीएसी जवान मौजूद रहे। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव को उसके गांव नेवलापुर कड़े सुरक्षा घेरे में पहुंचाया।